समानता नहीं, विविधता है ताकत
प्रफुल्ल कोलख्यान आगे बढ़ने के पहले कुछ ध्यान दिलाना जरूरी है — अब धर्म एक मुखौटा है और कानून भी एक मुखौटा ही बनकर रह गया है। कानून के धर्म की नेक बात करते हुए, कभी धीरे से तो कभी जोर से धर्म को कानून का व्यावहारिक दर्जा मिल जाता है। धर्म और कानून के […]







