September 13, 2026
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मनुस्मृति से सीखा, कहाँ से सीखा!‎

सवाल साफ है, तो ये कहां से सीखा!

चंदा-चढ़ावा चोरी  पेपरलीक कराना!

बोलो-बोलो कहां से सीधा

नाना-परनाना-दादी कहां से सीखा!

सवाल साफ है, जवाब! जवाब लटपट है। 

लोकतंत्र का बुरा हाल है! 

विरोध जंतर-मंतर से 

मंत्रालय जादू-मंतर से!  

सवाल साफ है, जवाब! जवाब लटपट है। ‎

जादू-मंतर की सरकार के घर में भारी खटपट है।  ‎

लोकतंत्र का बुरा हाल है! ‎

जंतर-मंतर गगन घटा बन रही काल है। ‎

जाने किसी तरह से कितनी जनता पार्टी! ‎

लोकतंत्र के चीर-फाड़ से निकल रही है ‎

भांति-भांति की जनता पार्टी!‎

कॉकरोच जनता पार्टी कहीं!

तो कुत्ता जनता पार्टी कहीं है! ‎

कुत्ता कॉकरॉच परजीवी विरोध जंतर-‎मंतर से! ‎

मंत्रालय में जादू-मंतर है! लोकतंत्र अब छूमंतर है! ‎

हिंदुत्व की राजनीति जोर-जोर से चीख रही है। लगभग चीखते हुए उत्तर प्रदेश के महिमामंडित महंत मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ ने 24 अगस्त 2026 को रायबरेली में जनसभा में भाषण के बहाने से राहुल गांधी को संबोधित किया! राहुल गांधी रायबरेली के सांसद हैं।

राहुल गांधी के मनुस्मृति संबंधी बयान का जवाब अपने तरीके से देने की भरपूर कोशिश की, हास्यास्पद हो जाने की हद तक जाकर कोशिश की! हास्यास्पद हो जाने की जरा भी परवाह नहीं! 

सवाल साफ है — मनुस्मृति में स्त्रियों की जीवन स्थितियों के बारे में जो कहा गया है, उस का विरोध किया जाना चाहिए या उस का महिमामंडन किया जाना चाहिए! 

सवाल बिल्कुल सीधा-सादा है। जवाब भी सीधा-सादा होना चाहिए था, लेकिन नहीं जवाब लटपट! 

तो अब सीधा-सादा सवाल जनता को अपने-आप से पूछना चाहिए, अपने को अपने ही कठघेरे में खड़ा करना चाहिए! खुद से ही सवाल जरूर पूछना चाहिए। जब किसी लोकतंत्र का नागरिक खुद से ही जरूरी सवाल पूछना छोड़कर जीने लगता है तो वह अपनी गरिमा और अपना स्वराज दोनों को खोने के कगार पर जाकर खड़ा हो जाता है। जो नागरिक खुद को अपने ही सवालों के कठघेरे में नहीं करता है वह नागरिक सरकार को कठघेरे में क्या ही खड़ा कर सकता है! लोकतंत्र में स्वराज स्व का ही विस्तार होता है। जो नागरिक अपने-आप से सवाल, साफ-साफ  सवाल पूछना जाता है, वह सरकार को ढंग से सवालों के कठघेरा में नहीं घसीट सकता है।   

सीधा-सादा सवाल है — स्त्रियों की जीवन स्थितियों, छात्रों की परिस्थितियों, नागरिकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए संविधान का रास्ता सही मानती है या मनुस्मृति का, अथर्ववेद का, उपनिषदों का रास्ता अख्तियार करनेवाली है! क्या इस और ऐसे लटपट जवाबों से जादू-मंतर की सरकार लोगों को फिर एक बार बेवकूफ बनाकर, बहला-फुसलाकर अपनी चुनावी गोटी लाल कर लेने में कामयाब हो 

जायेगी!  

स्त्रियों की जीवन स्थितियों पर मनुस्मृति की व्यवस्था के प्रसंग में राहुल गांधी के उठाये सवालों का लटपट जवाब देख कर क्या कहा जा सकता है! उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत की काल गणना मनु की देन है, न कि किसी परिवार की। उनके शब्दों में, “हर सनातनी जिस काल गणना को मानता है, वह काल गणना किसी और ने नहीं, मनु ने दी है। यह आपके नाना ने नहीं दी है, परनाना ने नहीं दी है, आपकी दादी ने नहीं दी है — यह मनु ने दी है।” 

राम मंदिर चंदा-चढ़ावा चोरी  की बुद्धि कहां से आई! निमेष से लेकर ब्रह्माण्डीय चक्र तक काम आ रही अभेद्य दुर्बुद्धि किस के नाना, परनाना और किस की दादी ने दी है!

और हां! सांसद निशिकांत दुबे को सुनना हमेशा ज्ञानवर्धक होता है! भाजपा के सांसद निशिकांत दुबे ने भी राहुल गांधी के धर्म के बारे में क्या कहा है यह सुनना जरूरी है। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने 24 अगस्त 2026 को राहुल गांधी के मनुस्मृति संबंधी बयान के संदर्भ में उनके धर्म पर टिप्पणी की — 

“राहुल गांधी जी, आप फिरोज गांधी जी के पोते हैं यानी वंशज हैं। भारत के संविधान और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आप पारसी धर्म के हैं, आप अल्पसंख्यक हैं। Zoroastrianism (जरथुष्ट्र धर्म) आपका कर्म है। आपको सनातन धर्म यानी हिंदू धर्म, कुरान यानी मुस्लिम तथा बाइबल यानी ईसाई धर्म और धार्मिक ग्रंथों पर टिप्पणी करने का कोई हक और हकूक नहीं है।” मतलब यह कि “कुरान यानी मुस्लिम तथा बाइबल यानी ईसाई धर्म और ‎धार्मिक ग्रंथ” भी सनातनी हैं! यह भी कि जरथुष्ट्र धर्म सनातनी नहीं है। 

इसके अतिरिक्त, उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी को सनातन धर्म के अलावा अन्य धर्मों के ग्रंथों में भी समान विचारों को देखना चाहिए, क्योंकि यह देश हिंदू, मुस्लिम और ईसाई सभी का है। यह भी कि आज भारत में जितने ग्रंथ पर चर्चा होती है, सभी अंग्रेजों की कमिटि द्वारा अनुवादित (अनुदित) किया गया है। यह टिप्पणी राहुल गांधी द्वारा महिलाओं की स्वतंत्रता के ‎संदर्भ में मनुस्मृति पर की गई आलोचना के प्रत्युत्तर में आई ‎थी।

उफ्फ हमारे धर्म-ग्रंथों में भारी घुसपैठ!  जो हो इसी घुसपैठ आक्रांत धर्म-ग्रंथों की आस्था के हवाले से खड़ी की जा रही और की गयी सांप्रदायिक राजनीति और सांस्कृतिक टकराव का रास्ता अख्तियार करती रही है!

सवाल साफ है, जवाब! जवाब लटपट है। 

जादू-मंतर की सरकार के घर में भारी संकट है।  ‎

लोकतंत्र का बुरा हाल है! 

जंतर-मंतर गगन घटा बन रही काल है। 

जाने किसी तरह से कितनी जनता पार्टी! 

लोकतंत्र के चीर-फाड़ से निकल रही है 

भांति-भांति की जनता पार्टी!

कॉकरोच जनता पार्टी तो कहीं कुत्ता जनता पार्टी! 

कुत्ता कॉकरॉच परजीवी विरोध जंतर-‎मंतर से! 

मंत्रालय में जादू-मंतर है! लोकतंत्र अब छूमंतर है!