July 30, 2026
#National #Opinion #Politics

कभी गाड़ी पर नाव तो, कभी नाव पर गाड़ी

और तो और अयोध्या के स्थानीय बाशिंदों ‎को भी कार्यक्रम स्थल से दूर ही रखा गया था। कार्यक्रम के लिए जिस तरह से आमंत्रण-‎पत्र भेजा गया, जिस ढंग से आयोजन हुआ वह अद्भुत था! जिस ढंग से यह सब-‎कुछ हुआ उससे ऐसा लगा जैसे कि रास्ता निर्बल के नहीं रह गये, ऐसा लगा जैसे ‎कि राम कॉरपोरेट भगवान बना दिये गये हैं। भगवान राम पूजा से अधिक ‎पूंजी के होकर रह गये हैं। 

बहुत चूके, अब न चूके हिंदी-समाज और हिंदू-समाज! राष्ट्रीय स्वयंसेवक ‎संघ की रणनीति और ‎भारतीय जनता पार्टी की राजनीति को राम नाम ‎के ‎सहारे सत्ता के शिखर पर जनता ने ‎ पहुंचा दिया था। अब राम के नाम ‎को बदनाम करने के अपराध में शामिल होने के चलते उसी राष्ट्रीय ‎स्वयंसेवक संघ की रणनीति और भारतीय जनता पार्टी की राजनीति को ‎सत्ता के शिखर से लोकतांत्रिक सम्मान के साथ वही जनता उतार भी ‎लेगी!

‎सभ्य और शिष्ट लोकतांत्रिक प्रक्रिया फिर से बहाल होगी! ‎वक्त, वक्त की ‎बात! कभी गाड़ी पर नाव तो कभी नाव पर गाड़ी!

याद किया जाये कि अयोध्या में 22 जनवरी 2024 के प्राण प्रतिष्ठा के कार्यक्रम ‎का कई लोगों और संस्थाओं ने विरोध किया था। विरोध के अपने-अपने तर्क थे. ‎अपने-अपने कारण थे। शंकराचार्यों ने दूरी बना ली थी। कांग्रेस के नेता राहुल ‎गांधी के पास अपने कारण थे, और मजबूत कारण थे। उन्होंने उसे भारतीय जनता पार्टी के राजनीतिक ‎कार्यक्रम के रूप में अपनी कुशाग्र राजनीतिक दक्षताओं से चिह्नित किया था।

और तो और अयोध्या के स्थानीय बाशिंदों ‎को भी कार्यक्रम स्थल से दूर ही रखा गया था। कार्यक्रम के लिए जिस तरह से आमंत्रण-‎पत्र भेजा गया, जिस ढंग से आयोजन हुआ वह अद्भुत था! जिस ढंग से यह सब-‎कुछ हुआ उससे ऐसा लगा जैसे कि रास्ता निर्बल के नहीं रह गये, ऐसा लगा जैसे ‎कि राम कॉरपोरेट भगवान बना दिये गये हैं। भगवान राम पूजा से अधिक ‎पूंजी के होकर रह गये हैं। ‎

चतुर्दिक विरोध के बावजूद 22 जनवरी 2024 को प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम ‎संपन्न हुआ। इरादा साफ था, और इरादा था मई 2024 के लोकसभा चुनाव में 400 के पार ‎पहुंचना। अपने राजनीतिक लक्ष्य को हासिल करने के लिए किसी भी राजनीतिक, ‎गैर-राजनीतिक और अनैतिक काम से कोई परहेज नहीं था। विपक्ष के नेताओं को ‎ही नहीं, शंकराचार्यों और असहमत साधु-संन्यासियों को भी लांछित, अपेक्षित और ‎अवहेलित होना पड़ा।

‎’एक अकेला, सब पर भारी’ के दर्प में पूरे आत्म-विश्वास के साथ 400 पार के ‎अभियान पर निकल पड़े — सब-कुछ मोदीमय हो गया और मोदी! मोदी भगवान ‎हो गये! लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव का नतीजा आया तो काफी परेशान ‎करनेवाला! 400 पार तो दूर सामान्य बहुमत से भी बहुत पीछे रह गये। राहुल ‎गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस सौ के करीब पहुंच गई। अखिलेश यादव के नेतृत्व में ‎समाजवादी पार्टी के सांसदों की संख्या भी ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच गई। ‎

हालांकि, भारतीय जनता पार्टी को एक अकेले दम बहुमत हासिल नहीं हो पाया ‎लेकिन एनडीए गठबंधन को बहुमत हासिल था! कई राजनीतिक विशेषज्ञ और ‎विश्लेषकों को लगा कि नरेंद्र मोदी को गठबंधन सरकार चलाने का अनुभव नहीं है ‎और जैसा उनका रवैया रहा है, सरकार बहुत दिन तक न चल पायेगी! यह ठीक है ‎कि नरेंद्र मोदी को गठबंधन सरकार चलाने का अनुभव नहीं था, किंतु तेलगू देशम ‎पार्टी (टीडीपी) के नेता एन. चंद्रबाबू नायडू और जनता दल यूनाइटेड के नेता ‎नीतीश कुमार को गठबंधन चलाने का खूब अनुभव था।

कुल मिलाकर यह कि कॉरपोरेट भगवान के भरोसे 400 के पार पहुंचना संभव ‎नहीं हुआ तो क्या हुआ ओडिशा विधानसभा की 147 सीटों में से 79 सीटों पर ‎दर्ज कर सत्ता में आ गई और ऊपर से 3 निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी ‎हासिल कर लिया। अद्भुत यह कि राजनीतिक आस्था बेझिझक ‘जय श्री राम’ से ‎‎‘जय जगन्नाथ’ पर फिसल गई! कहने में सच्चे भारतीय की साभ्यतिक शर्म आ रही ‎है कि न सिर्फ राजनीतिक आस्था फिसल गई बल्कि जय श्रीराम के प्रति घोषित ‎आस्था आत्मघाती अर्थनैतिक फिसलन में बदल गई। शुरू हो गई चंदा-चढ़ावा ‎चोरी और नृपेंद्र मिश्र के अनुसार डकैती!

राजनीति धार्मिक आस्था ‎को अपनी कुत्सित मंशा से लपेट लेती है। नैतिक और अर्थनैतिक विश्वास और आस्था को पलटकर आपराधिक फिसलन में बदल देती है! श्रीराम जन्मभूमि ‎तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में चंदा-चढ़ावा-चोरी-डकैती इसका क्लासिकल उदाहरण है।

राम ‎मंदिर ट्रस्ट में हुए घोटाले की जांच-पड़ताल सिर्फ पैसा-कौड़ी में हेरा-फेरी की नजर में ‎आजाद भारत का सबसे ज्यादा गंभीर मामला है। भारत की आजादी के बाद का ‎सबसे ज्यादा गंभीर मामला इसलिए है कि यह सिर्फ पैसा-कौड़ी में हेरा-फेरी का ‎नहीं, बल्कि राजनीति में धर्म और धर्म में राजनीति की मिलावट की दोहरी ‎आपराधिकता से जुड़ा मामला है। इसलिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में ‎हुए घोटाला, कह लें चंदा-चढ़ावा-चोरी-डकैती की जांच-पड़ताल दोहरी ‎आपराधिकता के संदर्भों में गहरी शोध-दृष्टि से किये जाने की अनिवार्य जरूरत है।

‘हिंदू ‎एकता’ की धूर्त संघी आवाज में छिपी चुनावी धूर्तताओं से हिंदुओं को सावधान हो ‎जाना चाहिए — एक-दो बार की गलती को भोलापन माना जा सकता है किंतु ‎गलतियों में दोहराव निश्चित रूप से पतनशीलताओं का भ्रम-रहित लक्षण है।

इस भ्रम-‎रहित लक्षण को जल्द-से-जल्द सही तरीके से ‎समझकर अगला जनादेश तय करने ‎में ही बुद्धिमानी है। लाख टके का सवाल यह है कि क्या हिंदी-समाज और हिंदू-‎समाज राजनीति में धर्म की मिलावट से उत्पन्न भारत के समाज की त्राहि-त्राहि ‎को समझ-बूझकर झूठ और झूठ की राजनीति से मुक्ति का रास्ता निकाल पायेगा! ‎क्या अब भी यह बात समझने में दिक्कत है कि राजनीति में धर्म और धर्म में ‎राजनीति की मिलावट लोकतंत्र के अपराधीकरण की प्रक्रिया है।

लोकतंत्र के ‎अपराधीकरण की इस प्रक्रिया के पहले चक्र पूरा होते ही समाज के अपराधीकरण ‎की प्रक्रिया चक्रवृद्धि गति पकड़ लेती है। कहने में कोई संकोच नहीं है कि उत्तर ‎प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 का चुनाव नतीजा बतायेगा कि लोकतंत्र के ‎अपराधीकरण की चाक्रिकता टूटती है या समाज के अपराधीकरण की चक्रवृद्धि ‎प्रक्रिया ही तेज गति पकड़ लेती है।  ‎

राजनीति में धर्म की मिलावट नहीं रुकती है, तो रामकथा में निहित भक्तों के ‎विश्वास और आस्था पर आघात पहुंचेगा। उस विश्वास और आस्था को आत्मघात ‎के रास्ता पर अधिक-से-अधिक ताकत से धकेल दिया जायेगा जिस विश्वास और ‎आस्था को गोस्वामी तुलसीदास ने जनजीवन से जोड़ दिया। गंगा समान सब के ‎हित के भरोसे का क्या होगा — “कीरति भनिति भूति भलि सोई। सुरसरि सम ‎सब कहँ हित होई।।”   ‎

बताया गया है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक आज होनेवाली है। ‎राम मंदिर ट्रस्ट के ‘नेतागण’ अपने-अपने बचाव का रास्ता निकालने की जुगत ‎भिड़ायेंगे। ट्रस्ट के प्रति विश्वास बहाल करने की कोशिश करेंगे अर्थात  धर्म में ‎राजनीति और राजनीति में धर्म की मिलावट की धूर्तताओं के लिए नये सिरे से ‎जाल बिछाये जायेंगे — जोरशोर से गायेंगे हिंदू तन-मन, हिंदू जीवन, रग-रग ‎हिंदू मेरा ‎परिचय!‎ अटल विहारी बाजपेयी के हिंदू तन-मन, हिंदू जीवन, रग-रग ‎हिंदू मेरा ‎परिचय!‎ क्या यही परिचय है! ‎

ट्रस्ट अपने को बचाने की जुगत भिड़ाये इसका ‘हक’ है उन्हें। लेकिन अपने ‘हिंदू तन-मन, ‎हिंदू जीवन, रग-रग हिंदू मेरा ‎परिचय’ के विश्वास और आस्था को बचाने के लिए ‎हिंदू-समाज को नये सिरे से राजनीतिक बुद्धिमानी से काम लेना होगा! सभ्य और ‎शिष्ट लोकतांत्रिक प्रक्रिया बहाल हो पायेगी?‎

बहुत चूके, अब न चूके हिंदी-समाज और हिंदू-समाज! राष्ट्रीय स्वयंसेवक ‎संघ की ‎रणनीति और ‎भारतीय जनता पार्टी की राजनीति को राम नाम ‎के ‎सहारे सत्ता के ‎शिखर पर जनता ने ‎ पहुंचा दिया था। अब राम के नाम ‎को बदनाम करने के ‎अपराध में शामिल होने के चलते उसी राष्ट्रीय ‎स्वयंसेवक संघ की रणनीति और ‎भारतीय जनता पार्टी की राजनीति को ‎सत्ता के शिखर से लोकतांत्रिक सम्मान के ‎साथ वही जनता उतार भी ‎लेगी! ‎

सभ्य और शिष्ट लोकतांत्रिक प्रक्रिया फिर से बहाल होगी! ‎वक्त, वक्त की ‎बात! ‎कभी गाड़ी पर नाव तो कभी नाव पर गाड़ी!‎

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