July 30, 2026
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राम मंदिर चढ़ावा-चंदा चोरी मामला – चंपत-अनिल के इस्तीफे मंजूर

चोर ने ही चोर को निकाला और जो बचा वो चोर ही

ऋषि याज्ञवल्क्य लिखित बृहदारण्यक उपनिषद् के पांचवें अध्याय के आरंभ में एक कथन है –

ऊँ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते, पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते।

इसका अर्थ है – वह परब्रह्म पूर्ण है और यह सृष्टि भी पूर्ण है। उस परब्रह्म पूर्ण से ही यह जगत या सृष्टि उत्पन्न हुआ है। पूर्ण परब्रह्म में से पूर्ण सृष्टि को निकाल देने पर भी वह पूर्ण परब्रह्म ही शेष बचता है। 

इस कथन का विस्तार बहुत ही व्यापक औऱ सारगर्भित है। आध्यात्मिक रूप से गहन अर्थ वाले इस मंत्र को राममंदिर चढ़ावा चोरी के चोरों-डकैतों पर लागू करने की हिम्मत तो नहीं है, लेकिन इसके कुछ सूत्र विनोदवश ही सही इस परिप्रेक्ष्य में भी लागू होते हैं।

देखिए कैसे इस कथन का एक अंश राममंदिर चढ़ावा-चंदा चोरों पर भी लागू होता है। राम मंदिर चढ़ावा-चंदा चोरी से जुड़े श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास और हिन्दू धर्म के ठेकेदार चोरों-डकैतों ने कल बैठक की। यह बैठक कुछ फैसला करने के लिए था जिसमें प्रमुख था कि न्यास के अधिकांश चोरों में से कुछ चोरों को न्यास से निकाल बाहर किया जाए, निकाल बाहर करने के बाद जो कुछ चोर बचेंगे, उन्हीं चोरों में से कुछ को राममंदिर चढ़ावा-चंदा की रखवाली और चोरी के संयुक्त काम पर लगाया जाएगा।

न्यास की बैठक कल अयोध्या में आहूत की गई थी और बैठक आयोजित भी हुई। इस बैठक में दो-चार फैसले लिए गए। उन फैसलों पर बात करने से पहले इस न्यास से दो-चार सवाल। क्या श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास को चोरी की बात कई सालों से मालूम नहीं थी। क्यों महिपाल सिंह नामक एकाउन्टेंट को चढ़ावा चोरी की बात करने पर इस न्यास से निकाल दिया गया। पिछले चौबीस वर्षों से एक ही आदमी चंपत राय बंसल पर ही क्यों भरोसा किया गया था।

चंपत बंसल और अनिल मिश्रा से इस्तीफा लिया गया, लेकिन उन पर एफआईआर तक नहीं किया गया और उनके घर पर बुलडोजर कब चलेगा, यह योगी आदित्यनाथ जैसे न्यायप्रिय मुख्यमंत्री से पूछना उचित होगा। सदस्य गोपाल राव और कोषाध्यक्ष गोविन्द गिरी को क्लीनचिट मिल गई क्यों-कैसे। क्या इनके उपर एफआईआर नहीं होना चाहिए और इनको गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के बीमार चल रहे अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने इस मामले पर पहली बार बोलते हुए यह कहा कि राम लला मंदिर मे चढ़ावे की कथित चोरी से वह बहुत दुखी हैं। इस बैठक में न्यास के सदस्य कृष्णमोहन को अंतरिम महासचिव बनाया गया है। दो घंटे चली इस बैठक में यह फैसला हुआ कि बाइस जुलाई को स्थायी महासचिव की नियुक्ति की जाएगी और बाकी चोरियों पर पर्दा डाल दिया गया, जैसेकि कुछ हुआ ही नहीं हो।

दूसरी ओर इलाहाबाद उच्च न्यायालय के लखनऊ पीठ में इस विषय पर दायर याचिका पर सुनवाई करने से साफ इन्कार कर दिया। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में यह कहा कि चूंकि इससे संबंधित एक मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है, इसलिए हम इस पर विचार नहीं कर सकते।  

यह न्यास का गठन प्रधानमंत्री कार्यालय के आदेश पर हुआ तो प्रधानमंत्री की कोई जिम्मेवारी क्यों नहीं है। इस न्यास को आरटीआई से मुक्ति मिली हुई है, यानि कुछ भी करो चोरी या डकैती कोई कुछ नहीं बोलेगा। क्या हिन्दू समाज भी नहीं। इस न्यास में कोषाध्यक्ष की कोई जिम्मेवारी नहीं है, वो कहता है उसके पास चेकबुक भी नहीं, ये कैसा कोषाध्यक्ष है कि उसके पास चेकबुक नहीं। इसका प्रहसन हो गया है कि राम मंदिर का कोष तो अयोध्या में कार्यरत है और लेकिन इसका कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी पुणे में रहता है।

चोरी को बाद वही एक चिट्ठी लिखता है कि चोरों को बक्शा नहीं जाएगा और न्यास की बैठक में वही सदारत करेगा और उसी की चलती होगी क्योंकि वह तो प्रधानसेवक मोदी को चम्मच से अमृत पिलाता है, तो वह तो चोर हो ही नहीं सकता है। यह कोषाध्यक्ष एक महीने से क्या कर रहा था, जबसे राममंदिर चोरी की घटना मीडिया में आई। राममंदिर चोरी पर इतना विवाद हुआ यह चुपचाप पुणे में था और बीच में मध्यप्रदेश जाकर डी.लिट् की डिग्री दूसरे चोर मोहन यादव से ले आया। चोर-चोर मौसेरे भाई।

इस चोरी में प्रमुखता से आए एक और नामी चोर गोपाल राव, जो सह-संघचालक दत्तात्रेय होसबोले का हमराज है और कर्णाटक का रहने वाला है, और उसके भतीजे आकाश आनंद को क्यों छोड़ दिया गया, जिसके ऊपर आरोप है कि वह नियमित अयोध्या से बोरा में भरकर सोना-चांदी-रूपया नकद ट्रेन से कर्णाटक ले जाता था और हवाई जहाज से वापस आता था। साथ ही, यह देखिए कि कैसे जिस कोषाध्यक्ष को राममंदिर चोरी प्रकरण में जेल में होना चाहिए वह निर्लज्जता से बैठक आयोजित करता है और प्रेस को इसके अंतरिम महासचिव के बारे में सूचना देता है। शर्मनिरपेक्षता के दौर में हिंदू हृदय के पत्थर होने में कुछ बाकी नहीं रहा है।

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