July 30, 2026
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राम तेरे कितने नाम – चोर तेरे कितने काम

राममंदिर चंदा-चढ़ावा मामला

वर्ष 2002 की बात है रामलला टेंट में मौजूद थे। परमहंस रामचंद्र दास जी राममंदिर आन्दोलन से जुड़े हुए थे। इस बीच 2002 में विश्व हिन्दू परिषद् के अभी के उपाध्यक्ष और पुराने सदस्य चंपत राय बंसल रामजन्मभूमि न्यास से जुड़ जाते हैं।

इसी बीच, राममंदिर में लगाने के लिए देश भर से आई 1250 हीरा-मणि-माणिक्य जड़ित चांदी की शिलाएं गायब हो जाती हैं। यह राममंदिर में हुई पहली चोरी थी। इसके चोर को अभी तक नहीं पकड़ा गया। शक की सूई किसकी ओर जा रही है, आप समझ सकते हैं।

अटल बिहारी बाजपेयी कहते थे यदि कुत्ता चोरों पर न भौंके, तो समझिए वह भी चोरों से मिला हुआ है या उसने अपनी वफादारी बदल दी है।

यदि उस चोरी की घटना को सुलझा लिया जाता और चोर पकड़ लिया जाता तो इस तरह की संगठित अपराध की तरह राममंदिर के नाम से उसके निर्माण में 40% कमीशनखोरी न होता और विगत दो दशकों से चंदा-चढ़ावा चोरी का पाप नहीं जुड़ता औऱ देश कलंकित नहीं होता। न हिन्दू कलंकित होता और न हिन्दू हृदयसम्राट तक इसकी आंच जाती।

उधर अयोध्या में बड़े चोर छुट्टा सांढ़ की तरह बेलफायर(टोयोटा की एक करोड़ की कार) में घूम रहे हैं और कोषाध्यक्ष गोविन्द देव गिरी कह रहे हैं मैं क्यूं इस्तीफा दूँ। राममंदिर का कोष वर्षों से लुटता रहा और अभी फिर लुट गया तो क्या कोषाध्यक्ष को नहीं हटाना उचित था। जिस गोपाल राव और उसके भतीजे आकाश आनंद के ऊपर बोरा में भरकर सोना-चांदी-रूपए ले जाने के आरोप लगे, उन दोनों को क्यों नहीं जेल में डाला गया।

सूत्र बताते हैं कि राम मंदिर न्यास के कोषाध्यक्ष गोविन्द देव गिरी के पास हेलीकॉप्टर है। बीस-बीस विद्यालय गोविन्द देव गिरी ने दूसरे जगहों पर खुलवाए हैं। ये कोषाध्यक्ष हैं और राम के कोष की चोरी का पता नहीं? सवाल ही नहीं उठता कि उसे पता न हो। सारे चोर एक दूसरे से मिले हुए हैं।

गोपाल राव मीडिया के सामने आकर बोल रहा है मुझे राममंदिर न्यास से निकाला नहीं गया है। ये सारे चोर – उल्टा चोर कोतवाल को डांटे- कहावत को चरितार्थ करते घूम रहे हैं। लगता है हिन्दू धर्म के ठेकेदार भाजपा-आरएसएस-बिहिप के कारकून अब अपने पूरे जोर-शोर से हिन्दू धर्म और उसके भगवानों को रसातल की ओर ले जाकर ही दम लेंगे। अब तो उचित यही है कि इन चोरों के बदले सारे अयोध्यानिवासियों को जेल में भेज दिया जाए।

हुआ भी कुछ ऐसा ही है, सीसीटीवी लगे होने के बावजूद जिन लोगों ने गड्डियों की गड्डियाँ निकाली उन्हें जेल में डाला जा रहा है, लेकिन यह भी सच है कि सोना-चान्दी गला-गलाकर और हीरा-माणिक्य निकाल निकाल कर इसके पैसे बाहर भेजे गए। कहां भेजे गए और किसको भेजे गए, इसी की तो जांच की जानी चाहिए। सीबीआई-ईडी-हाई कोर्ट-सुप्रीम कोर्ट के स्तर से इसकी जांच होनी चाहिए।

एसआईटी ने अपने अंतरिम जांच में जो कहा उस आघार पर तो ट्रस्ट और उसके आधिकारियों को पहले जेल फिर बेल की नौबत आनी चाहिए थी, लेकिन सभी अयोध्या में ही बेशर्मों की तरह पड़े हुए हैं और तरमाल खा रहे हैं।

अयोध्या में राम मंदिर चोरी मामले में गिरफ्तार किए गए लोगों में से तीन लोगों को स्थानीय अदालत ने एक दिन के पुलिस रिमांड पर जेल भेज दिया। ये क्या हो रहा है इतना बड़ा कांड हुआ है करोड़ों करोड़ की चोरी और आस्था पर डाका पड़ा है और आरोपियों को चौबीस घंटे के लिए या एक दिन के रिमांड पर जेल भेजा जा रहा है।   

आरोपियों की निशानदेही पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नाम से छपवाई गई फर्जी रसीदों की रसीदबुक बरामद की गई है। इनके माध्यम से श्रद्धालुओं से फर्जी रसीद देकर दान वसूली की जाती थी।  

विशेष जांच दल (एसईटी) की शुरूआती रिपोर्ट में अविनाश शुक्ला को मुख्य आरोपी बनाया गया है। जांचकर्ताओं को शक है कि 40 दिनों में 70 बार से अधिक मंदिर के दान की रकम गिनती के दौरान चोरी की गई थी।

दूसरी ओर उत्तराखंड के बद्रीनाथ मंदिर में भी वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। इन आरोपों के बाद बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के एक कर्मचारी को निलंबित कर दिया गया है और जांच शुरू की गई है।

एक और फर्जी रसीदों से पैसे वसूलने का मामला मध्यप्रदेश में आया है। मालवा के नलखेड़ा स्थित माँ बगलामुखी मंदिर में दान से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की उच्च-स्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं। लगता है भाजपा-आरएसएस ने मंदिरों के प्रबंध को अपने लिए कमाई का पुख्ता साधन बना लिया है।                                                            

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