October 6, 2026
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निकोबार को अडानी-मोदी का एप्सटीन आईलैंड बनने से बचाना होगा

अडानी के मेगा पोर्ट प्रोजेक्ट को रोकने के लिए भारत में एक मुहिम की आवश्यकता है। एम.राजेन्द्रन ग्रेट निकोबार द्वीप पर गौतम अडानी का प्रस्तावित ट्रांस-शिपमेंट पोर्ट भारत के सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक विरासत स्थलों में से एक के लिए महत्वपूर्ण जोखिम पैदा करता है। इस बड़े पैमाने पर विकास को रोकना द्वीप के अद्वितीय पर्यावरण […]

ढहते भारतीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम सेक्टर

लोग अक्सर कहते हैं कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन जब हम पिछले 12 वर्षों के वास्तविक आंकड़ों को देखते हैं, तो यह दावा पूरी तरह सही नहीं प्रतीत होता। एम.राजेन्द्रन भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के नीतिगत दृष्टिकोण ने तीन परस्पर जुड़ी कमियों को प्रदर्शित […]

मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा नामांकन के निरस्त होने पर मचा बवाल

कांग्रेस की मध्यप्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवार और टीम राहुल गांधी की तेज-तर्रार महिला नेत्री मीनाक्षी नटराजन को उस समय बहुत बड़ा धक्का लगा जब मध्य प्रदेश निर्वाचन पदाधिकारी ने उनका राज्यसभा नामांकन का पर्चा निरस्त कर दिया। इस पर पूरे मध्यप्रदेश से लेकर नई दिल्ली तक बवाल मचा हुआ है। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश राज्य […]

मीडिया जान ले — आगे खतरा है!

संजय झा क्या एक ईमानदार पत्रकार के लिए मुख्यधारा की मीडिया में यकीनन कोई जगह नहीं? क्या चापलूसी, झूठ और कुतर्क ही पत्रकारिता है अब? क्या मीडिया सत्ता का सुरक्षा कवच है? कुछ लोग जो सामाजिक सरोकार, नैतिकता और संवैधानिक मूल्यों की तिलांजलि नहीं दे पाए वो वैकल्पिक आयाम खोजने लगे. तकनीकी क्रांति ने संचार […]

वैश्विक झटके, टेक रीसेट और बदलते उपभोक्ता रुख से निपटना

मई-जून 2026 का आर्थिक परिदृश्य एक दिलचस्प विरोधाभास पेश कर रहा है: एक तरफ गहरा भू-राजनीतिक बिखराव और बढ़ती वैश्विक दरारें हैं, तो दूसरी तरफ कॉर्पोरेट और उपभोक्ता क्षेत्रों में बेहद लचीला, ढांचागत बदलाव देखने को मिल रहा है।ऑर्गनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक को-ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (OECD) ने 2026 के लिए अपने वैश्विक विकास अनुमान को घटाकर […]

भारतीय इक्विटी संरचना और कॉर्पोरेट पुनर्गठन

मॉर्गन स्टेनली का ढांचागत आशावाद बनाम एफआईआई का तनाव भारतीय इक्विटी बाजार अल्पकालिक व्यापक आर्थिक चिंताओं और दीर्घकालिक कमाई की वास्तविकताओं के बीच एक कड़ा मुकाबला देख रहा है। मॉर्गन स्टेनली का बाजार विश्लेषण दृढ़ता से तेजी का रुख बनाए हुए है, जिसका मानना है कि घरेलू कमाई में सुधार के चक्र के कारण भारतीय […]

वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल, बाजार के झटके और कॉर्पोरेट दोराहे पर

मार्केट पल्स: भू-राजनीतिक झटके और संस्थागत पलायन 1 जून, 2026 को भारतीय शेयर बाजार का परिदृश्य इस बात का एक बड़ा अहसास था कि कैसे घरेलू आर्थिक सकारात्मकता वैश्विक और व्यापक आर्थिक (Macro) वास्तविकताओं के सामने घुटने टेक सकती है। व्यापारिक सत्र की शुरुआत काफी उत्साहजनक रही, जहां मजबूत चौथी तिमाही (Q4) के कॉर्पोरेट नतीजों […]

कॉर्पोरेट जगत: परोपकार, 5G स्लाइसिंग और टेक वैल्युएशन

शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव से इतर, भारतीय कॉर्पोरेट गवर्नेंस के सबसे ऊंचे स्तरों पर एक गहरा वैचारिक और नियामक टकराव चल रहा है।टाटा संस की लिस्टिंग का विवाद – टाटा संस में, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के बीच एक गहरा वैचारिक मतभेद खुलकर सामने आया है। […]

बॉलीबुड सिनेमा – कहानियों का अभाव या नेपोटिज्म की मार

प्रवीण भारद्वाज पिछले कई वर्षों से बॉलीवुड की कहानियों को लगता है कि लकवा मार गया है। कोविड और उसके बाद पिछले पांच वर्षों का एक सामान्य लेखा-जोखा करें तो हम पाते हैं कि बॉलीवुड ने हिट कम और फ्ल़ॉप फिल्में ज्यादा दी हैं। इस दरम्यान हुआ ये है कि बॉलीवुड की ऑरिजिनल फिल्मों से […]