मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा नामांकन के निरस्त होने पर मचा बवाल
कांग्रेस की मध्यप्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवार और टीम राहुल गांधी की तेज-तर्रार महिला नेत्री मीनाक्षी नटराजन को उस समय बहुत बड़ा धक्का लगा जब मध्य प्रदेश निर्वाचन पदाधिकारी ने उनका राज्यसभा नामांकन का पर्चा निरस्त कर दिया। इस पर पूरे मध्यप्रदेश से लेकर नई दिल्ली तक बवाल मचा हुआ है। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश राज्य से एक कांग्रेस और दो भाजपा के राज्यसभा सांसद चुनकर जाने थे। लेकिन कल मध्यप्रदेश में एक अचानक से घटे घटनाक्रम में भाजपा ने अपना तीसरा उम्मीदवार घोषित कर दिया और मध्यप्रदेश भाजपा के महामंत्री राहुल कोठारी के लगाए गए आरोप कि उनके खिलाफ एफआईआर हुई है, जिसकी जानकारी निर्वाचन पर्ची में नहीं है। इस पर मीनाक्षी नटराजन को निर्वाचन आयोग में बुलाया गया और उनका पक्ष सुना गया। पक्ष सुनने के बाद मीनाक्षी के विरूद्ध फैसला लेते हुए निर्वाचन आयोग ने उनका पर्चा निरस्त कर दिया।
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इस पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा ने निर्वाचन आयोग पर आरोप लगाया कि पूरा पर्चा सही जानकारी के साथ भरकर उन्होंने जमा किया था। नामांकन पत्र भरने की अंतिम तारीख आठ जून थी। सारी प्रक्रियाएँ पूरी की जा चुकी थी और मध्यप्रदेश विधानसभा में विधायकों की संख्याबल के आधार पर यह तय था कि भाजपा के दो और कांग्रेस के एक सांसद राज्यसभा में जा सकते थे।
सवाल यह भी उठता है कि मीनाक्षी नटराजन ने पर्चा में एफआईआर की पूरी जानकारी दी कि नहीं या गलत जानकारी दी इसकी सूचना भाजपा महामंत्री राहुल कोठारी को किसने दी, क्या निर्वाचन आयोग ने? यह सूचना तो गोपनीय श्रेणी में आती है। तो इसका मतलब निर्वाचन आयोग ने जानकारी लीक की है, जिसके बाद भाजपा नेता द्वारा यह आरोप लगाया गया वह भी गलत कि एफआईआर की सूचना छिपाई गई। जबकि लीगल नोटिस किसी भी तरह से किसी एफआईआर की श्रेणी में नहीं आता और लीगल नोटिस के बाद भी कोई जरूरी नहीं कि किसी कोर्ट में केस दर्ज हो।

भाजपा नेता के लगाए गए आरोप की जहां तक बात है तो मीनाक्षी नजराजन को एक लीगल नोटिस भेजा गया था न कि एफआईआर की गई थी। तो एफआईआर की बात झूठी है, जिसके आधार पर भाजपा नेता के लगाए आरोप पर निर्वाचन आयोग ने कार्रवाई की है। विवेक तन्खा की माने तो मीनाक्षी के निर्वाचन पर्चा में सबकुछ सही-सही भरा गया था और कहीं कोई कमी नहीं थी। उल्लेखनीय है कि मीनाक्षी नटराजन 2009 में मंदसौर, मध्यप्रदेश से लोकसभा सदस्य रही हैं और वो कोई पहली बार इस तरह का नामांकन पर्चा नहीं भर रही थी कि इस तरह की कोई गंभीर गलती की गुंजाइश हो।
इस तरह, अंतिम समय में भाजपा ने नामांकन के अंतिम दिन तीसरे उम्मीदवार महेश केवट को मैदान में उतार दिया। इसके साथ ही, मीनाक्षी नटराजन और कांग्रेस के साथ निर्वाचन आयोग ने खेला शुरू कर दिया और गलत आरोप लगाकर और सूचना छिपाने के नाम पर पर्चा निरस्त कर असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक खेल किया है। यह टीम राहुल और कांग्रेस के युवा ब्रिगेड पर किया गया निम्नस्तरीय हमला है। अब देखना है कि कांग्रेस इस स्थिति से किस प्रकार निपटती है।
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