September 13, 2026
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आपातकाल पर कुछ भी बोलने से पहले भाजपा अपने गिरेबान में झांक ले – शिवानंद तिवारी

शिवानंद तिवारी

पटना में केंद्रीय मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने आपातकाल पर बोलते हुए राहुल गांधी से माफी मांगने की बात कही। इसमें कोई संदेह नहीं है कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र का एक काला अध्याय था। जहां तक मुझे स्मरण है कांग्रेस के अनेक वरिष्ठ नेताओं, जिनमें सोनिया गांधी और राहुल गांधी भी शामिल हैं, सार्वजनिक रूप से स्वीकार कर चुके हैं कि आपातकाल एक गंभीर भूल थी। इसलिए इस विषय पर कांग्रेस का पक्ष किसी हद तक स्पष्ट हो चुका है।

लेकिन श्री नड्डा के भाषण में कुछ ऐसे ऐतिहासिक संदर्भ दिए गए जिनकी सत्यता पर गंभीर प्रश्न उठते हैं।

उन्होंने कहा कि स्वर्गीय रमाकांत पांडेय ने जयप्रकाश नारायण को काली पूजा के अवसर पर बुलाया था, जहाँ छात्रों ने “लोकनायक जयप्रकाश ज़िंदाबाद” के नारे लगाए। मेरी जानकारी के अनुसार यह तथ्य ऐतिहासिक घटनाक्रम से मेल नहीं खाता। “लोकनायक” की उपाधि जयप्रकाश नारायण को आंदोलन के दौरान मिली थी।

इसके अतिरिक्त, पटना विश्वविद्यालय छात्रसंघ ने जिसमें लालू यादव अध्यक्ष और सुशील कुमार मोदी महासचिव थे जयप्रकाश जी को विश्वविद्यालय में आमंत्रित किया गया था और वहीं से छात्र-युवा आंदोलन को दिशा मिली।

दूसरों से माफी मांगने की अपेक्षा करने से पहले भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को भी आपातकाल के दौर के अपने आचरण पर प्रकाश डालना चाहिए।

मैं स्वयं उन दिनों फुलवारी शरीफ जेल में बंद था। विद्यार्थी परिषद के एक तत्कालीन वरीय पदाधिकारी ने माफीनामा लिखा था।

इतिहास यह भी बताता है कि श्रीमती इंदिरा गांधी ने जब बीस सूत्री कार्यक्रम की घोषणा की, तब तत्कालीन सरसंघचालक बाला साहब देवरस ने उसका समर्थन किया था. उन्होंने पत्र लिखकर कहा कि यदि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से पाबंदी हटा ली जाए तो संघ के कार्यकर्ता बीस सूत्री कार्यक्रम के प्रचार-प्रसार और क्रियान्वयन में सहयोग करेंगे। वह माफीनामा नहीं तो क्या था! यह एक ऐतिहासिक तथ्य है. आपातकाल के समय इंदिरा जी से सहयोग के लिए अब तक न तो संघ ने, न ही नड्डा जी की पार्टी ने खेद व्यक्त किया है.

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