लोकतंत्र बचाने के लिए सर कटा देंगे: राहुल गांधी
कांग्रेस पार्टी निष्पक्षता और संघर्ष की मिसाल है और इसकी जड़ें गहरी रही हैं। जितनी ज्यादा लोकतांत्रिक संस्थाएं और संवैधानिक संस्थाओं को भाजपा कैप्चर करती चली जाएगी, कांग्रेसी उतनी ही मजबूती के साथ उनसे लड़ेगी। भारत के संविधान और लोकतंत्र के लिए हम अपनी जान लड़ा देंगे। कांग्रेस पार्टी का मूलमंत्र ही है – सत्य, अहिंसा और करूणा।
राहुल गांधी ने नौ मिनट का एक वीडियो जारी किया है, जिसमें आठ जून को इन्डिया घटकदलों के साथ हुए बैठक में राहुल गांधी ने अपना जो वक्तव्य दिया था उसे देश की जनता के समक्ष प्रस्तुत किया है। यह वीडियो संदेश अभूतपूर्व है और राष्ट्रीय राजनीति, वोटचोरी, पेपरलीक, बेरोजगारी, सीटचोरी, संविधान एवं लोकतंत्र की रक्षा के संबंध में एक दस्तावेज से भी बढ़कर साबित होगा।
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तारीख में आम जनता को ऐसे संबोधन किसी भी उच्चस्तरीय राजनीतिज्ञ-कूटनीतिज्ञ द्वारा एक ऐसी ऐतिहासिक परिघटना बन जाता है, जिसे दशकों और सदियों तक याद किया जाता है। याद कीजिए ऐसा ही संबोधन, आजाद हिंद फौज के गठन के समय नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद रेडियो पर भारत की जनता के नाम संदेश में दिया था और आह्वान किया था – तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा। और कुछ ऐसा ही ऐतिहासिक संबोधन भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 14-15 अगस्त 1947 दरम्यानी रात में अंग्रेजों से सत्ता हस्तांतरण पर भारतीय संसद भवन में अपने मशहूर वक्तव्य – द ट्रिस्ट विद डेस्टिनी के रूप में दिया था।
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अपने कल के वीडियो में राहुल गांधी ने बहुत ही साफ लफ्जों में कहा कि कांग्रेस के हजारों हजार कार्यकर्ता शिव की तरह नीलकंठ बनकर विषपान करने के लिए तैयार हैं और इन्डिया गठबंधन के दलों से अह्वान करते हैं कि वो लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करें और सड़क पर कंधे से कंधा मिलाकर लड़ने के लिए तैयार हो जाएं, क्योंकि अब ये लड़ाई लंबी चलेगी और पेपरलीक की तरह आगे भी सड़कों पर लड़ी जाएगी। क्योंकि कांग्रेस की स्थापना ही अहिंसा, सत्य, भारत की अवधारणा – अनेकता में एकता, समावेशी समाज के निर्माण के लिए हुआ था और हमने देश को आजाद कराने के लिए कुर्बानी दी। हम आरएसएस के सामने कभी नहीं झुकेंगे।
मुझे यह कहते हुए अत्यंत दुख है कि हमारे साथी दल सपा, तृणमूल, राकांपा, राजद यह सोचते हैं कि सभी राजनैतिक टूल आगे भी काम करेंगे, जैसा अभी तक करते रहे हैं, लेकिन स्थितियां अब पहले जैसी नहीं रहीं। भाजपा ने सारे संवैधानिक संस्थाओं पर केन्द्रीय स्तर पर और राज्य स्तर पर नियंत्रण कर लिया है और नौकरशाही, लीगल सिस्टम, चुनाव आयोग उसके हाथों की कठपुतली बनकर रह गया है। मेरे कई साथी टीएमसी में हैं और वे सोच रहे थे कि वे हालिया पश्चिम बंगाल के चुनाव को जीत रहे हैं, जबकि मैंने उन्हें इस मुगालते में रहने से मना किया था। हमने अपनी आँखों से इसे गुजरात, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, हरियाणा, बिहार सभी राज्यों में देखा और चुनावी निष्पक्षता पर मेरा पक्का मानना है कि भारत के चुनाव अब निष्पक्ष और साफ-सुथरे नहीं रह गए हैं। लेकिन आपमें से बहुत सारे लोग यह मानने को तैयार नहीं थे।
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कांग्रेस पार्टी निष्पक्षता और संघर्ष की मिसाल है और इसकी जड़ें गहरी रही हैं। जितनी ज्यादा लोकतांत्रिक संस्थाएं और संवैधानिक संस्थाओं को भाजपा कैप्चर करती चली जाएगी, कांग्रेसी उतनी ही मजबूती के साथ उनसे लड़ेगी। भारत के संविधान और लोकतंत्र के लिए हम अपनी जान लड़ा देंगे। कांग्रेस पार्टी का मूलमंत्र ही है – सत्य, अहिंसा और करूणा। क्या है असली संघर्ष का उत्स। मैं किसी दिन उठकर आपसे अपने घटक दलों से ही लड़ सकता हूँ क्योंकि मैं आपसे-अपने घटकदलों से प्यार करता हूँ। नीतीश कुमार मेरे कारण इन्डिया गठबंधन से नहीं गए थे, वो आपके कारण छोड़ गए थे। भविष्य में और बहुत कुछ होनी बंद हो जाएंगी क्योंकि भाजपा और आरएसएस अपनी पकड़ और मजबूत कर रहे हैं भारतीय राज्यों पर। करीब एक सौ साल पहले भी ऐसा ही हुआ था हमारे साथ।
हम 1927 से पूर्व एक राजनीतिक पार्टी थे और जब महात्मा गांधी ने आह्वान किया कि हमें आजादी चाहिए। तब हमारा नजरिया और संघर्ष बदल गया। जब राजनीतिक दलों को चलने नहीं दिया जाता है, तो संघर्ष का काम बढ़ जाता है। संघर्ष काम करेगा, हम जब भी संघर्ष करेंगे, तो वह काम करेगा। हम संघर्ष करेंगे और अन्याय नहीं होने देंगे, जबरदस्त संघर्ष होगा। आपने देखा, जब हमने हमने कन्याकुमारी से कश्मीर तक 4000 किलोमीटर की भारत जोड़ो यात्रा की थी, वह संघर्ष की एक कड़ी ही तो थी। संघर्ष एक भावना का नाम है न कि कोई सांस्थानिक कार्य, यह एक सोच है, नजरिया है, एकदम पूर्णविराम। हम इसे पसंद करें या न करें और अपने नजरिए को बदलना होगा। और वो नजरिया होगा कि हम आपस में एक-दूसरे के साथ नहीं लड़ेंगे और प्रेस को एक भी ऐसा मौका नहीं देंगे कि वो हम पर हमला करें। हम संघर्ष करते रहेंगे।
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आप सोचते हैं कि हम अगले चुनाव में यह दिखा देंगे। अगला चुनाव हमने जीत लिया है। इसे ऐसे समझिए कि भारत की जनता में इतना गुस्सा है कि हम अगला चुनाव जीत गए हैं समझो। लेकिन दिक्कत ये है कि आरएसएस ने राज्य-केन्द्र की सारी मशीनरी पर कब्जा कर लिया है और दिक्कत ये भी है कि अब फ्री और फेयर इलेक्शन होना असंभव है भारत में, जिससे कि हम अगला चुनाव जीत सकें। इसलिए हमें संघर्ष के रास्ते पर चलना ही होगा। संघर्ष के अलावा कोई रास्ता अब नहीं बचा। संघर्ष का रास्ता है नीट पेपरलीक, सीबीएसई और भारत जोड़ो यात्रा आदि। सुबह उठो और सोचो कि चलो चलकर संघर्ष करते हैं- देखते हैं कितना संघर्ष करना होगा। यही काम करेगा और मैं गारंटी देता हूँ कि यह काम करेगा।
यहां यह स्पष्ट करता चलूं कि मैं किसी प्रकार की आलोचना के लिए तैयार हूँ, क्योंकि यह मेरे लिए आध्यात्मिक काम की तरह होगा और कोई राजनीति नहीं समझे इसे। मैं हर आलोचना के लिए तैयार हूँ। लेकिन उससे पहले हमारे सभी घटकदलों को यह समझ लेना होगा कि बिहार-बंगाल-महाराष्ट्र राज्य के सभी चुनाव और यहां तक कि 2024 के लोकसभा चुनाव भी हमसे चोरी की गई है। ये सभी चुनाव हम जीते हुए थे और चुनाव आयोग और लीगल सिस्टम ने हमें हराया है। सोशल मीडिया से हम चुनाव नहीं जीत पाएंगे। सोशल मीडिया, नौकरशाही, पुलिस, चुनाव आयोग, मीडिया, लीगल सिस्टम सभी आरएसएस और भाजपा से गठबंधन में हैं।
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लेकिन यह सरकार नहीं जिंदा रह सकती है, क्योंकि इसने हमारे लोकतंत्र को खतम किया है, भारत के भविष्य को बर्बाद किया है। ईरान युद्ध के बाद जो होने वाला है, वह स्थिति अब इस सरकार के नियंत्रण से बाहर निकल जाएगा। इससे ही वो रास्ता निकलेगा और वो जगह बनेगी जिसमें हमारे लिए संघर्ष करना आसान हो जाएगा। इसलिए कृपया एकजुट हो जाएं, नहीं तो इतिहास हमें माफ नहीं करेगा। इसलिए एक हो जाएं। इसलिए तैयार हो जाएं। हम भाजपा को उखाड़ फेकेंगे और राज्य दर राज्य, चुनाव दर चुनाव हम भाजपा को सत्ता से उखाड़ फेकेंगे।
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