July 30, 2026
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‘चलो संसद’ मार्च: जंतर-मंतर से संसद मार्ग तक हाई-वोल्टेज ड्रामा; दिपके ने अनशन तोड़ा, वांगचुक के भी अनशन समाप्त करने के संकेत

नई दिल्ली, 20 जुलाई। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहा सोनम वांगचुक का आंदोलन सोमवार को उस समय निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया, जब हजारों प्रदर्शनकारी “चलो संसद” मार्च के लिए जंतर-मंतर पर जुटे। राजधानी के संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल और केंद्रीय अर्द्धसैनिक बल (CAPF) की तैनाती की गई थी। संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को कई स्थानों पर बैरिकेड लगाकर रोका गया, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई।

प्रदर्शनकारियों का दावा है कि बैरिकेड तोड़ने की कोशिश के दौरान पुलिस ने बल प्रयोग किया और लाठीचार्ज भी किया। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई किए जाने की बात कही है। पुलिस की ओर से लाठीचार्ज के आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक बयान का इंतजार है।

सुबह से ही जंतर-मंतर पर देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे छात्रों, युवाओं, शिक्षकों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। आंदोलनकारियों का कहना था कि यह केवल एक व्यक्ति का आंदोलन नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की लड़ाई है। “धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो” और “लोकतंत्र बचाओ” जैसे नारों से जंतर-मंतर और आसपास का इलाका गूंजता रहा।

इससे पहले दिल्ली पुलिस ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया था। अस्पताल सूत्रों के अनुसार उनकी हालत पर लगातार चिकित्सकीय निगरानी रखी जा रही है। आंदोलन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि चिकित्सकों की सलाह और साथियों के आग्रह को देखते हुए सोनम वांगचुक जल्द अपना आमरण अनशन समाप्त कर सकते हैं। हालांकि, इस संबंध में आंदोलन की ओर से आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोमवार को अपना अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त कर दिया। दिपके ने कहा कि उन्होंने यह फैसला सोनम वांगचुक के आग्रह पर लिया है ताकि आंदोलन का नेतृत्व और संगठनात्मक कार्य बाधित न हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष जारी रहेगा और आंदोलन को देशव्यापी जनअभियान का रूप दिया जाएगा।

जंतर-मंतर से वांगचुक को हटाए जाने के बाद आंदोलन की कमान संभाल रहे दिपके ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति की नहीं बल्कि व्यवस्था में जवाबदेही की है। उन्होंने समर्थकों से शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रखने और किसी भी उकसावे से बचने की अपील की।

राजधानी में सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं। संसद मार्ग, विजय चौक और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। कई मेट्रो स्टेशनों पर भी सुरक्षा बढ़ाई गई है और संसद क्षेत्र में प्रवेश करने वाले वाहनों की गहन जांच की जा रही है।

उधर, विपक्षी दलों की ओर से भी आंदोलन को लेकर सरकार पर निशाना साधा जा रहा है, जबकि केंद्र सरकार अब तक अपने रुख पर कायम है। सरकार की ओर से आंदोलन की मांगों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

लगातार तीन सप्ताह से अधिक समय तक चले इस आंदोलन ने अब राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का रूप ले लिया है। एक ओर सरकार पर आंदोलनकारियों से संवाद शुरू करने का दबाव बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर आंदोलन का नेतृत्व आगे की रणनीति तय करने में जुटा है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि क्या सोनम वांगचुक वास्तव में अपना अनशन समाप्त करेंगे और क्या सरकार आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों पर बातचीत का रास्ता खोलेगी।