CJP का लक्ष्य क्या है? धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, इतना ही बस!
CJP दीपके का जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन और भूख हड़ताल (अनशन) का लक्ष्य क्या है? धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, इतना ही बस!
इस आंदोलन से वांगचुक का जुड़ना आंदोलन की विश्वसनीयता को बल देता नज़र आ रहा था। लेकिन यह आंदोलन अचानक अपने उद्देश्य से भटकता नज़र आ रहा है। संवेदनहीन सत्ता से निराश होकर अब इनके नेता अपनी विफलताओं को लेकर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर मुखातिब भी हैं और तोहमत भी लगा रहे हैं कि इस आंदोलन में वे नहीं आए!
दीपके-CJP का यह आंदोलन कांग्रेस और राहुल के अहम प्रयासों तथा उनके द्वारा दूषित व्यवस्था के विरुद्ध चलाए जा रहे आंदोलन के समानांतर, छोटे लक्ष्य के साथ शुरू करना यह दिखाता है कि राहुल गांधी के प्रयासों को छोटा करना और युवाओं को खेमों में बांटकर भ्रम की स्थिति पैदा करना इसका उद्देश्य रहा है।
जब पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त व्यापक भ्रष्टाचार तथा उसके दुष्परिणामों के भारत की युवा पीढ़ी पर पड़ने वाले दूरगामी प्रभावों की चिंताओं को लेकर राहुल गांधी ने एक अभियान छेड़ रखा था, तभी विदेशी धरती से अचानक भारत आकर तुच्छ लक्ष्य के लिए एक बड़े और व्यापक आंदोलन के समानांतर आंदोलन की तैयारी स्थानीय स्तर पर करना, तथा प्रबुद्ध वर्गों और अल्टरनेटिव मीडिया का ध्यान आकर्षित कर राहुल गांधी की मुहिम को नकारने का प्रयास, एक सोची-समझी नैरेटिव के तहत किया जा रहा है। क्योंकि भारत पहुंचते ही दीपके के साथ सरकार का रवैया यह दर्शाता है कि “कॉकरोच आंदोलन” जैसा जो दिखता है, उसके पीछे की कहानी कुछ और भी हो सकती है।
क्यों आज मीडिया में यह बात तूल पकड़ रही है कि राहुल गांधी को जंतर-मंतर पर आकर वांगचुक का साथ देना चाहिए? आखिर क्यों?
राहुल गांधी का “छात्रों की गूंज” आंदोलन एक राष्ट्रव्यापी मुहिम है, जिससे वर्तमान सरकार के अलोकतांत्रिक और युवाओं के भविष्य के खिलाफ चलाए जा रहे कुत्सित षड्यंत्र को रोका जा सके। शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन, संस्थाओं का निष्पक्ष होना और युवाओं के भविष्य को आने वाले वक्त के अनुसार रचनात्मक, वैज्ञानिक और आधुनिक वैश्विक धाराओं के अनुरूप गढ़ना ही राहुल गांधी का लक्ष्य है।
यहीं पर राहुल गांधी की larger-than-life छवि से घबराकर सरकार ने उनके खिलाफ कई योजनाएं तैयार कर रखी हैं। दीपके की चाल कहीं उसी योजना का हिस्सा तो नहीं है?
उनके असीम प्रयासों में अड़चनें लाख आएं, षड्यंत्रों की बाढ़ और भ्रम के जंजाल में राहुल को फंसाने की कोशिश कामयाब होने वाली नहीं है। उनका रास्ता और संघर्ष भले लंबा हो, लेकिन उनकी नीयत और उद्देश्य हमेशा राष्ट्रहित, युवाओं और आमजन के कल्याण के लिए ही रहे हैं।









