June 15, 2026
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राज्यसभा सीट चोरी में सुप्रीम कोर्ट भी शामिल – दिग्विजय सिंह

पिछले बारह सालों में सुप्रीम कोर्ट के एक के बाद एक माननीय मुख्य न्यायाधीशों एवं अन्य न्यायाधीशों ने ऐसे-ऐसे फैसले दिए हैं जिससे आम जनता का भारतीय न्याय प्रणाली और सुप्रीम कोर्ट पर से विश्वास ही उठ गया है, लेकिन फिर भी किसी ने सुप्रीम कोर्ट को आज तक आइना दिखाने का काम नहीं किया है। यह पहली बार हुआ है कि किसी भी वरिष्ठ नेता ने सुप्रीम कोर्ट पर राज्यसभा सीट चोरी जैसा इल्जाम लगाया है और सुप्रीम कोर्ट को चुनाव आयोग द्वारा की गई राज्यसभा सीट चोरी में शामिल बताया है। यह भी इल्जाम लगाया गया कि पहले सुप्रीम कोर्ट वोटचोरी में शामिल था और अब सीट चोरी में शामिल है।

सुप्रीम कोर्ट ने कल मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा पर्चा निरस्त करने से संबंधित याचिका की खारिज

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके और वहां से राज्यसभा सांसद रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने  न भूतो न भविष्यति जैसा आरोप भारत के सर्वोच्च न्यायालय पर लगाया कि मध्यप्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवार के रूप में खड़ी पूर्व लोकसभा सांसद मीनाक्षी नटराजन का निर्वाचन पर्चा निरस्त करने के खेल में चुनाव आयोग, भाजपा की केन्द्र सरकार सहित माननीय सर्वोच्च न्यायालय भी शामिल है। अगर ऐसा नहीं है तो सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे की सुनवाई त्वरित रूप से केस दायर होते ही कल क्यों नहीं की, चार बजे तक समय था और क्यों इसे अगले दिन के लिए टाल दिया। इसलिए इस सीट चोरी का संदेह सुप्रीम कोर्ट पर भी जाता है।

हुआ भी इसके अनुरूप ही, अगले दिन बारह जून को इस मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान अदालत हस्तक्षेप नहीं करती और इस आधार पर याचिका खारिज कर दिया। अब कोई सूरत नहीं बची और चुनावी प्रक्रिया के बाद पुनः अदालत का रास्ता बचा है औऱ सभी जानते हैं कि अदालतें इस तरह के मामले में कैसे काम करती हैं।  

इतना बड़ा आरोप किसी भी दल के किसी भी नेता द्वारा भारत के सर्वोच्च न्यायालय पर पहली बार लगाया गया है। आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ कि किसी वरिष्ठ राजनेता द्वारा इस तरह के आरोप सर्वोच्च न्यायालय पर लगाया गया हो। आज देश के लोकतांत्रिक, सामाजिक, आर्थिक ढांचे, सरकार की कार्यपालिका और विधायिका से लेकर नागरिक जीवन तक से संबंधित सर्वोच्च न्यायालय में दायर केसों में सुप्रीम कोर्ट के सरकारपरस्त एकतरफा फैसलों को लेकर आम जनता, राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन बहुत त्रस्त हैं और नाराज भी हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के डर से किसी की चूं आवाज नहीं निकलती।

पिछले बारह सालों में सुप्रीम कोर्ट के एक के बाद एक माननीय मुख्य न्यायाधीशों एवं अन्य न्यायाधीशों ने ऐसे-ऐसे फैसले दिए हैं जिससे आम जनता का भारतीय न्याय प्रणाली और सुप्रीम कोर्ट पर से विश्वास ही उठ गया है, लेकिन फिर भी किसी ने सुप्रीम कोर्ट को आज तक आइना दिखाने का काम नहीं किया है। यह पहली बार हुआ है कि किसी भी वरिष्ठ नेता ने सुप्रीम कोर्ट पर राज्यसभा सीट चोरी जैसा इल्जाम लगाया है और सुप्रीम कोर्ट को चुनाव आयोग द्वारा की गई राज्यसभा सीट चोरी में शामिल बताया है। यह भी इल्जाम लगाया गया कि पहले सुप्रीम कोर्ट वोटचोरी में शामिल था और अब सीट चोरी में शामिल है।

पिछले बारह सालों की यदि बात करें, तो जबसे महामानव का भारतीय राजनीति के धरातल पर अवतार हुआ है तब से लेकर एक भी ऐसा फैसला नहीं आया जिसमें आम आदमी या भारत की विपक्षी दलों को कोई राहत मिली हो। उदाहरण देखें – राफेल की खरीद में हुए घपले – जिसमें 58891 करोड़ रूपए में दसौं एविएशन फ्रांस से केवल 36 राफेल जेट खरीदे गए, जबकि मनमोहन सिंह सरकार में उसी दसौं एविएशन फ्रांस से उसी कीमत पर 126 राफेल जेट खरीदे जाने थे और फ्रांस को एचएएल को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर भी करना था – इस केस को बहुत खूबसूरती से रफ-दफा कर दिया माननीय सुप्रीम कोर्ट और उनके माननीय मुख्य न्यायाधीश आदि ने, फिर आया आनन-फानन में राममंदिर का निर्णय – इसे भी बहुत तेजी से और सरकार के सामने झुकते हुए निपटा दिया गया, आज तक उद्धव ठाकरे की महाराष्ट्र सरकार पर सर्वोच्च न्यायालय ने अपना रूख साफ नहीं किया, इसी तरह से जम्मू-कश्मीर से धारा 370 को हटाने और उसे केन्द्रशासित प्रदेश बनाने या धारा 370 के कुछ प्रावधान हटाने को लेकर भी जल्दबाजी दिखाई गई, अभी हाल ही में बिहार चुनाव में आनन-फानन में किए गए एसआईआर प्रक्रियाओं में चुनाव आयोग द्वारा की गई गड़बड़ियों – जिसमें कुल 65 लाख लोगों के नाम काटे गए और संवैधानिक प्रक्रियाओं को ताक पर रखकर जिस प्रकार बिहार के जिंदा लोगों को मृत बताकर मतसूची से नाम काटा गया और सरकार के साथ गलबहियां डालकर सुप्रीम कोर्ट ने भारत के नागरिकों को मताधिकार से वंचित करने का काम किया, वह इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ। ऐसा ही पश्चिम बंगाल में हुए हालिया चुनाव में पहले 95 लाख और फिर पुनरीक्षित रूप से 27 लाख लोगों के नाम काटे गए और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान कहा कि जिन्हें इस चुनाव में मतदान देने का मौका नहीं मिला, उनको अगले चुनाव में वोट देने दिया जाएगा। ऐसा कहकर साफ तौर पर सुप्रीम कोर्ट चुनाव आयोग और केन्द्र की भाजपा सरकार के स्कीम में शामिल होता हुआ दिखाई दिया। जब भी लगा कि अब सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से सही सवाल पूछे हैं और सुनवाई के दौरान सरकार को और उसके सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को जमकर लताड़ा है और अब सुप्रीम कोर्ट का फैसला सही-सही आएगा, लेकिन हुआ इसका ठीक उलटा। लोग ठगे से रह गए कि ये क्या सुप्रीम कोर्ट भी कलाबाज हो गया, मदारी की तरह दिखाता कुछ है और फैसला कुछ आता है।

इस प्रकार, सुप्रीम कोर्ट के कई न्यायाधीशों पर ही नहीं मुख्य न्यायाधीशों के फैसलों पर कई सवाल उठे? अब सुप्रीम कोर्ट पर दाग लग चुका है। अब यह सुप्रीम कोर्ट पर निर्भर करता है कि अपने ऊपर लगे इस और इस जैसे कई दागों को किस तरह से छुड़ाता है।

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