July 30, 2026
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ग्राउंड रिपोर्ट: सुबह-सुबह जंतर-मंतर पर पुलिस की कार्रवाई, सोनम वांगचुक को हटाया गया; प्रदर्शनकारियों में अफरा-तफरी

नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर पिछले 21 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को शनिवार सुबह दिल्ली पुलिस ने भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आंदोलन स्थल से हटाकर अस्पताल पहुंचा दिया। इस दौरान जंतर-मंतर पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस और केंद्रीय अर्द्धसैनिक बल (CAPF) के जवान बड़ी संख्या में पहुंचे, जिनमें कई सादे कपड़ों में थे, और उन्होंने अचानक पूरे धरना स्थल को अपने कब्जे में ले लिया। पुलिस का कहना है कि वांगचुक की लगातार बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्हें आवश्यक चिकित्सकीय देखभाल के लिए अस्पताल ले जाना जरूरी था।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कार्रवाई तड़के शुरू हुई। कुछ ही मिनटों में मंच के चारों ओर सुरक्षा घेरा बना दिया गया। आंदोलनकारियों का दावा है कि मंच को चारों ओर से सफेद बेडशीटों से ढक दिया गया, जिससे बाहर मौजूद लोगों और मीडिया की नजरें भीतर की गतिविधियों तक न पहुंच सकें। इसके बाद पुलिसकर्मी सोनम वांगचुक तक पहुंचे और उन्हें एंबुलेंस तक ले जाया गया। इस दौरान समर्थकों ने नारेबाजी की और पुलिस कार्रवाई का विरोध किया। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।

जंतर-मंतर पर मौजूद लोगों का कहना है कि पूरी कार्रवाई बेहद तेजी से अंजाम दी गई। कई प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें मंच के करीब जाने से रोका गया और कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया गया। पुलिस की ओर से इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।

इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने आरोप लगाया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान उनके साथ धक्का-मुक्की की गई और उन्हें हिरासत में लिया गया। दिपके का कहना है कि आंदोलन को बलपूर्वक समाप्त करने की कोशिश की गई, जबकि पुलिस ने अब तक इन आरोपों पर विस्तार से प्रतिक्रिया नहीं दी है।

पुलिस का पक्ष इससे अलग है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि सोनम वांगचुक का स्वास्थ्य लगातार गिर रहा था और चिकित्सकीय सलाह के आधार पर उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाना आवश्यक था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्हें दिल्ली के वीएमएमसी एवं सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी चिकित्सकीय निगरानी की जा रही है।

कार्रवाई के बाद भी जंतर-मंतर पूरी तरह शांत नहीं हुआ। बड़ी संख्या में छात्र, युवा और समर्थक वहीं डटे रहे। कई लोग “चलों संसद” के प्रस्तावित 20 जुलाई मार्च को हर हाल में आयोजित करने की बात कहते रहे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आंदोलन किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही और सुधार की मांग का आंदोलन है।

फिलहाल जंतर-मंतर और उसके आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती की गई है और आने-जाने वालों पर नजर रखी जा रही है। आंदोलनकारियों और प्रशासन के बीच टकराव की आशंका को देखते हुए स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। आने वाले 48 घंटे इस आंदोलन की दिशा तय कर सकते हैं, क्योंकि एक ओर सोनम वांगचुक अस्पताल में हैं और दूसरी ओर उनके समर्थक 20 जुलाई के संसद मार्च की तैयारियों पर अड़े हुए हैं। सरकार की अगली रणनीति और आंदोलनकारियों की प्रतिक्रिया पर अब पूरे घटनाक्रम की नजरें टिकी हैं।