July 30, 2026
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महाभारत आधारित पंडवानी गायिका पद्मविभूषण तीजनबाई का प्रयाण

तीजनबाई को 1987 में पद्मश्री 2003 में पद्मभूषण 2019 में पद्मविभूषण से भारत सरकार ने सम्मानित किया था। इसके साथ-साथ तीजन बाई को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से भी पुरस्कृत किया गया था। वो मंच पर एकतार वाले तंबूरे बजाकर प्रस्तुति दिया करती थी।

छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोकगायन शैली पंडवानी को विश्व के पटल पर पहचान दिलाने वाली और महाभारत आधारित इस गायन शैली की प्रख्यात गायिका और पद्मश्री, पद्मभूषण एवं पद्मविभूषण सम्मानित तीजन बाई का कल रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(एम्स) में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह 70 वर्ष की थी। रविवार को ही छत्तीयगढ़ के दुर्ग जिला के उनके पैतृक गांव गनियारी में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।

महाभारत की कहानियों को वैश्विक मंचों तक अपनी जोरदार आवाज और अद्भुत् लोकगायन शैली के माध्यम से पहुंचाने वाली तीजन बाई को अंतिम विदाई देने के लिए वहां सैकड़ों की तादाद में लोग पहुंच गए। उनकी दमदार आवाज, शानदार हाव-भाव और प्रभावशाली प्रस्तुति के करोड़ों लोग दीवाने थे।

तीजनबाई को 1987 में पद्मश्री 2003 में पद्मभूषण 2019 में पद्मविभूषण से भारत सरकार ने सम्मानित किया था। इसके साथ-साथ तीजन बाई को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से भी पुरस्कृत किया गया था। वो मंच पर एकतार वाले तंबूरे बजाकर प्रस्तुति दिया करती थी।

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के गनियारी गांव में 1956 में तीजन एक गरीब पारधी आदिवासी परिवार में जन्मी थी। वहां से निकलकर विश्व के बड़े से बड़े सांस्कृतिक मंचों तक दमदार प्रस्तुति का तीजन बाई का सफर असाधारण दृढ़ता, मजबूत हौसलों और कलात्मक उत्कृष्टता का प्रतीक है।

जाने-माने थियेटर कलाकार और निर्देशक हबीब तनवीर ने तीजन बाई की प्रतिभा को पहचाना और उन्हें इन्दिरा गांधी के सामने प्रस्तुति देने का सुझाव दिया।

पहले पहल जब तीजन महज तेरह साल की थी, तो किसी अनजाने से मंच पर महाभारत की। था सुनाई थी। तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि आदिवासी समुदाय की यह लड़की किसी दिन राज्य की लोकगायकी पंडवानी को विश्व मंचों तक लेकर जाएगी और प्रदेश एवं देश का नाम रौशन करेगी। उसे गाने-बजाने के कारण समाज से अलग-थलग कर दिया गया था।

अपने अथक प्रयासों से और अपनी विशेष प्रतिभा के बदौलत वह छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोककला पंडवानी की सबसे प्रतिष्ठित और सबसे लोकप्रिय कलाकार बनकर उभरीं। मंच पर तंबूरे के साथ शानदार प्रस्तुति देने के लिए विख्यात तीजन बाई ने लोकगाथा कहने की कला को रंगमंच का रूप दे दिया।

पंडवानी यानि पांडवों की आवाज महाभारत के किस्सों की नाटकीय शैली, गायन और वाद्य यंत्रों के साथ संगीतमय प्रस्तुति देने वाली एक विशिष्ट लोककला है, जिसे तीजन बाई ने अपनी दमदार आवाज, प्रभावकारी हाव-भाव, लयबद्ध गायनशैली, नाटकीय भाव-भंगिमाओं और जोरदार मंचीय प्रस्तुति के कारण जन-जन के मनों-हृदयों तक पहुंचा दिया।

उस महान लोकगायिका और रंगमंच की अद्भुत् कलाकार को अंतिम प्रणाम और भावभीनी श्रद्धांजलि।        

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