July 30, 2026
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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव जमीन खरीद भ्रष्टाचार में बुरी तरह फंसे

केन्द्र पर हमलावर कांग्रेस ने मप्र के मुख्यमंत्री मोहन यादव को पद से हटाने की मांग की

कल एक धमाकेदार प्रेस कांफ्रेस में देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव पर जमीन खरीद से संबंधित घपले, धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार, संवैधानिक पद के दुरूपयोग, संविधान की शपथ का उल्लंघन, अनैतिक लेन-देन और अपने निकट संबंधियों को गैर-कानूनी तरीके से लाभ पहुंचाने का आरोप लगाते हुए इस संबंध में न्यायिक जांच की मांग करते हुए मुख्यमंत्री पद से तुरंत इस्तीफे की मांग की।

अभी अयोध्या के राम मंदिर में चंदा, चढ़ावा, सोना-चांदी के आभूषण, चांदी की मूर्तियाँ-शिलाओं की आरएसएस-विहिप-बजरंगदल-भाजपा पृष्ठभूमि के पदाधिकारियों द्वारा वर्षों से चली आ रही सिलसिलेवार चोरी कम और डकैती ज्यादा जैसे अनैतिक कृत्यों की खबर बासी भी नहीं हो पाई थी कि बीच में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार के पूरे कुनबे द्वारा महाकालेश्वर शिव की नगरी उज्जैन शहर और सिंहस्थ कुंभ मेले के आस-पास के करीब दो सौ एकड़ की जमीन खरीदी में धांधली की बात सामने आई है।

कांग्रेस ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव पर जमीन खरीद से संबंधित भ्रष्टाचार के मामल की न्यायिक जांच की मांग करते हुए उनसे मुख्यमंत्री पद से तुरंत इस्तीफे की मांग की। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि इतने बड़े पैमाने पर मप्र के मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार वालों ने जो भ्रष्टाचार किए हैं उस पर केन्द्र की मोदी सरकार चुप क्यों है।

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता पवन खेड़ा और मध्यप्रदेश के कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रेस कांफ्रेस में कहा कि जमीन घोटाले की स्वतंत्र जांच तब तक संभव नहीं है जब तक मोहन यादव मुख्यमंत्री की कुर्सी पर मौजूद हैं। देश की न्याय प्रक्रिया की पहली शर्त होती है कि अभियुक्त किसी ऐसे पद पर तो नहीं है जिस पद पर रहते हुए वह जांच प्रक्रिया को प्रभावित कर सके और इस मामले में तो अभियुक्त राज्य का मुखिया है और सर्वोच्च पद पर ही बैठा हुआ है, इसलिए भी मोहन यादव को तुरंत पद से हटाया जाए। पवन खेड़ा ने कटाक्ष करते हुए आगे एक नारे को रूप में कहा – अयोध्या-उज्जैन तो झांकी है, काशी-मथुरा अभी बांकी है।

पवन खेड़ा ने कहा कि अयोध्या-उज्जैन से देश के ही नहीं बल्कि विदेश के लोगों की भी आस्था जुड़ी हुई है। इन तीर्थस्थलों से रुपया-पैसा-गहना-चढ़ावा आदि लूटना देश को आस्थावान लोगों की आस्था की पीठ में खंजर घोपने जैसा है। भाजपा, आरएसएस, विहिप के लोग संस्थागत लूट में शामिल रहे हैं। उल्लेखनीय है कि दो साल बाद सन् 2028 में उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ मेले का आयोजन किया जाएगा। इससे पहले उज्जैन शहर और मेला परिसर के चारों ओर की सैकड़ों एकड़ जमीनें मोहन यादव एण्ड कंपनी ने खरीद कर हथिया लिए हैं, ताकि इससे अकूत कमाई की जा सके।

इस मामले में प्रधानमंत्री से कुछ अनुरोध करना न करना एक जैसा है, क्योंकि तीन सप्ताह हो गए राममंदिर मे चढ़ावे की लूट-डकैती की खबर आए हुए, अभी तक किसी एक अपराधी को जेल में नहीं डाला गया है और न ही किसी अपराधी पर एफआईआर ही हुई है। ये वही सरकार है जो केवल किसी की शिकायत-सूचना करने पर ही मुस्लिम नागरिकों के घरों-दुकानों को बिना न्यायालय से अनुमति के या कोर्ट की प्रक्रिया या डिक्री के बिना ही बुलडोजर से आनन-फानन में गिरा देती है और मिनटों में न्याय कर देती है, लेकिन राममंदिर में अनुमानित तौर पर करीब पांच-छह हजार करोड़ रूपयों की चोरी-डकैती की गई है और चोर सामने है, लेकिन उसे गिरफ्तार नहीं किया जा रहा है।     

इस न खाउंगा न खाने दूंगा की मोदी सरकार ने पिछले बारह सालों में भ्रष्टाचार के कई नए-नए प्रतिमान गढ़े हैं और कई पुराने कीर्तिमान तोड़े हैं। राफेल चोर गद्दीछोड़, चौकीदार ही चोर है से लेकर अब पेपरलीक, वोटचोर गद्दी छोड़, सीटचोर गद्दी छोड़ से होते हुए राममंदिर दान चोरी, राममंदिर चढ़ावा चोरी तक मोदी सरकार, आरएसएस, भाजपा, विश्व हिन्दू परिषद्, बजरंगदल और इसके केन्द्र तथा राज्य सरकारों ने चोरी-डकैती-भ्रष्टाचार-अनैतिकता के रिकार्ड पर रिकार्ड तोड़े हैं।

हर बार की तरह इस बार भी केन्द्र सरकार के सारे मंत्री, प्रवक्ता औऱ प्रधानमंत्री के मुंह पर अलीगढ़ी ताला लगा हुआ है और वे इस प्रतीक्षा में हैं कि कब कोई दूसरा खबरिया बम फूटे और हेडलाइन पलटे और हम उस खबर की आड़ में इस मोहन यादवी भ्रष्टाचार और राममंदिर चोरी-डकैती कांड से बाहर निकलें। जनता का क्या है कल सब भूल ही जाएगी और जैसे पुराने सारे पापों से हमें बरी करती रही है, उसी तरह इस बार भी करेगी।   

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