अयोध्या में राम मंदिर में दान-चढ़ावा चोरी
आरएसएस, विश्व हिन्दू परिषद्, बजरंग दल और भाजपा का कुप्रबंधन, कुकर्म, कुकृत्य का संगम
अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इसके जद में अब आरएसएस, विश्व हिन्दू परिषद्, बजरंग दल और भाजपा, राममंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट उसके कुछ कार्यकर्ता एवं अधिकारी आते जा रहे हैं। राम मंदिर को दान किए गए चांदी के सैकड़ों-हजारों ईंटे, सालों-साल से जमा साढ़े बारह सौ हीरे-जवाहरात जड़े ईंटों के अलावा, मंदिर निर्माण के लिए जमा चंदा और हाल में जबसे मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा का हल्ला- गुल्ला शुरू हुआ है, तबसे लेकर अब तक कई सौ किलो चांदी, सोने के नए-पुराने आभूषण, करोड़ों-करोड़ की नकदी के गायब होने की खबर लगातार मिल रहृी है।
राम मंदिर में लगातार कई सालों से हो रहे इस चोरी का मामला खुल जाने से राज्य और केन्द्र सरकार के महकमे में अफरा-तफरी मचनी तय थी और मची भी। भाजपा राज्य सरकार ने आनन-फानन में विशेष जांच दल यानि एसआईटी का गठन किया और जिसका रिपोर्ट कल राज्य सरकार के समक्ष प्रस्तुत कर दिया गया। रुपयों-पैसों और कीमती चीजों के प्रबंधन में कमियां पाई गई हैं और इस संबंध में विभिन्न लोगों पर एफआईआर करने की संस्तुति की जाए।
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एसआईटी के अध्यक्ष और लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने कल पत्रकारों को बताया – आज हमने शासन द्वारा गठित तीन सदस्यीय एसआईटी की जांच रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव – गृह, उत्तर प्रदेश को सौंपी। यह प्रारंभिक प्रतिवेदन है। चोरी और गबन से जुड़े सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि यह गोपनीय जांच है, जिसे अभी पत्रकारों को बताया नहीं जा सकता है।
सूत्रों ने बताया कि रिपोर्ट में उन लोगों के नाम शामिल हैं जो चढ़ावे के पैसे और कीमती सामान की देखभाल, गिनती और उन्हें बैंक ले जाने की प्रक्रिया में शामिल थे और सीसीटीव फुटेज के रखरखाव के प्रभारी थे। पिछले कई महीनों में कई बार सीसीटीवी फुटेज को मिटाए जाने के सबूत मिले हैं और इसके आरोप मंदिर प्रबंधन पर लगाए गए हैं। एसआईटी रिपोर्ट में दान और गिनती की निगरानी में शामिल मुख्य लोगों और बैंकिंग प्रक्रिया में शामिल लोगों के नाम बताए गए हैं।
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एसआईटी की सिफारिश में कथित गबन की प्रक्रिया में शामिल दान औऱ गिनती में शामिल सभी लोगों जिनकी संख्या तीस से चालीस तक बताई जाती है, उन्हें तत्काल प्रभाव से दानपेटी चोरी के कुप्रबंधन, कुकर्म और कुकृत्य का भागीदार बताकर इस कार्य से हटा दिया गया है। एसआईटी के गठन में एक प्रशासनिक सेवा अधिकारी, एक पुलिस सेवा अधिकारी और एक वित्त विभाग के विशेष सचिव शामिल थे। इस एसआईटी का गठन श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के शिकायत के आधार पर राज्य सरकार द्वारा की गई थी। ट्रस्ट की शिकायत में इस चोरी और गबन के मामले में सच्चाई जानने के लिए यह जांच कराया जाना आवश्यक था। यह कुकृत्य करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर चोट है और एक गहरी साजिश का हिस्सा लगता है।
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इस मामले की शुरूआत सात जून को तब हुई बताई जाती है जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कई सबूतों के हवाले से बताया कि राम मंदिर के दानपात्र में गबन का मामला चल रहा है और जिसकी जांच की जानी आवश्यक है। उन्होंने इसमें न्यायिक संज्ञान लेने की बात कही थी।
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