July 30, 2026
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सिक्किम:50 साल बाद



यशोदा श्रीवास्तव


बापू की अहिंसावादी सोच से प्रेरित होकर सिक्किम के लोगों ने लिया था भारत में विलय का फैसला

:भारत के पूर्वोत्तर में स्थित हिमालयी प्रदेश सिक्किम को आज जब हम उसके उदय के पचासवें साल में देखते हैं तो यह बहुत बदला हुआ और पहले की अपेक्षा काफी मनमोहक सा दिखता है। 1975 के पहले तक यह छोटी रियासत नामग्याल वंश के राजाओं के अधीन था। 1973 में यहां के लोगों ने विद्रोह कर दिया उसके बाद हुए जनमत संग्रह में करीब 95 प्रतिशत लोगों ने स्वतंत्र राज्य की मांग करते हुए भारत में विलय की इच्छा जताई। सिक्किम की राजधानी गेंगटोक में करीब 50 बुजुर्गों से बात करने पर यह खास बात सामने आई कि उन्होंने महात्मा गांधी की अहिंसावादी सोच को अंगीकार करते हुए भारत में विलय की इच्छा जताई थी। तमाम लोगों ने पंडित नेहरू को भी अपना रोल मॉडल बताया। गेंगटोक में नेहरू और महात्मा गांधी दोनों के स्टैच्यू विराजमान है।

राजधानी गेंगटोक में जहां महात्मा गांधी की दो दो प्रतिमाएं स्थापित हैं, उसे एमजी मार्ग के नाम से जाना जाता है। गेंगटोक का यह हिस्सा बहुत ही सुन्दर और साफ-सुथरा है। यहां मकानों की सिल्पकारी आपको किसी विदेशी शहर की अनुभूति कराती है। देखें तो पूरा का पूरा गेंगटोक ही विदेशी धरा पर बसा हुआ सुंदर और हरा भरा शहर लगता है। वैसे भी सिक्किम को भारत का सबसे हरा-भरा प्रदेश का दर्जा हासिल है।


सिक्किम के राजनीतिक परिदृश्य की बात करें तो भारत में विलय के बाद यहां सत्ता रूढ़ हुई सरकारें उस वक्त की ताकतवर केंद्र की सरकारों के साथ रही हैं। यहां 1974 में पहली बार काजी लेंडुप दोरजी के नेतृत्व में सिक्किम नेशनल कांग्रेस की लोकतांत्रिक सरकार सत्ता रूढ़ हुई। आगे चलकर इस पार्टी का विलय इंडियन नेशनल कांग्रेस में हो गया। कांग्रेस के गठबंधन में दोरजी के नेतृत्व वाली यह सरकार 1979 तक सिक्किम प्रदेश में सत्तारूढ़ रही। उसके बाद 1994 तक क्षेत्रीय प्रभाव वाली पार्टियां भी कांग्रेस के समर्थन अथवा गठबंधन में सरकार में रही हैं। इस तरह देखें तो भारत में विलय के बाद लंबे समय तक सिक्किम में कांग्रेस का प्रभाव कायम रहा। इसके बाद यहां पवन चामलिंग के नेतृत्व में सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट का उदय हुआ। पवन चामलिंग सिक्किम के सबसे लंबे समय तक 25 साल तक मुख्यमंत्री रहे। यह अलग बात है कि आज गेंगटोक में स्थित इनका सरकारी आवास भूत बंगला के रूप में परिवर्तित हो गया है। पवन चामलिंग पूर्वोत्तर में गठित नार्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस का हिस्सा रहे हैं जो केंद्र में भाजपा का समर्थन करती थी।

मौजूदा समय में सिक्किम में प्रेम कुमार तमांग के नेतृत्व में सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा की सरकार है जो केंद्र में भाजपा का समर्थक दल है।सिक्किम की राजधानी गेंगटोक की खूबसूरती शहर के किसी एक छोर से नहीं आंकी जा सकती,जीरो प्वाइंट होते हुए शहर के किसी भी कोने तक जाइए,मन मुग्ध हो जाता है। ऊंची नीची पहाड़ियों पर बसा यह शहर स्मार्ट सिटी के स्वरूप जैसा तेजी से विकसित हो रहा है।मई 2025 से अप्रेल 2026 तक सिक्किम के 50 वीं वर्षगांठ को स्वर्ण जयंती के रूप मनाया गया। अप्रेल 2026 में गेंगटोक में इसका समापन समारोह पूरी भव्यता के साथ संपन्न हुआ। इस समापन समारोह में प्रधानमंत्री मोदी मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत किए थे।

निसंदेह भारत के भीतर जब हम किसी खूबसूरत पर्वतीय शहर की कल्पना करते हैं तो सिक्किम की राजधानी गेंगटोक हमारे आंखों के सामने होता है। कदम कदम पर यहां की वादियां हमें अपनी ओर खींचती है। गेंगटोक में पिछले दो चार सालों में टैक्सियों में बेतहाशा इजाफा को देखते हुए कहा जा सकता है कि यहां पर्यटकों की आवाजाही में खूब बढ़ोत्तरी हुई है। पर्यटक ही यहां के लोगों की मुस्कान है। भारत के तकरीबन हर शहर से लोग यहां आते हैं। दिसंबर के आखिरी सप्ताह में यहां होटल मिलना बहुत मुश्किल होता है क्योंकि न्यू ईयर सेलीब्रेट करने वालों की यही भारी भीड़ जमा हो जाती है। यहां आने के लिए यूं तो कोई खास समय तय नहीं है लेकिन अप्रेल से जून तक यहां की चहल-पहल देखने लायक होती है।


यहां रोजगार की बड़ी उम्मीदें भले न हों लेकिन सूबे की सरकार की हर परिवार में एक नौकरी की कल्याणकारी योजना के चलते खुशहाली आपको हर चेहरे पर झलकती हुई दिखेगी। उद्योग के नाम पर यहां दवाओं और एल्कोहल की फैक्ट्रियां जरूर है लेकिन यह अपेक्षाकृत रोजगार उपलब्ध कराने की क्षमता नहीं रखती। पर्यटन के बाद चाय उद्योग इस प्रदेश की आर्थिक आय का दूसरा बड़ा माध्यम है। सुदूर पहाड़ पर स्थित टीमी टी गार्डन यहां का सबसे बड़ा चाय बागान है।खूबसूरती के साथ आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन क्या होता है, यहां आकर जाना जा सकता है। स्वच्छता के लिए बिना कोई बड़ा होर्डिंग अथवा प्रचार प्रसार के किसी सुंदरता को देखना हो तो गेंगटोक जरूर देखें। गंदगी के नाम पर सड़कों पर एक तिनका भी नजर नहीं आएगा।


2011 की जनगणना के अनुसार करीब साढ़े छः लाख की आबादी वाला यह प्रदेश भारत के सबसे छोटे राज्यों में से एक है। छः जिला और मात्र 32 विधायकों की संख्या वाला यह प्रदेश केंद्र शासित प्रदेश है। प्रस्तावित दो जिलों के और बन जाने से जिलों की संख्या आठ हो जाएगी। यहां लोकसभा के लिए एक और राज्यसभा के लिए भी एक सदस्य निर्वाचित होते हैं।


सिक्किम के उत्तर और उत्तरपूर्व में चीन का बार्डर है। गेंगटोक से चीन का बार्डर नाथूला करीब 58 किमी की दूरी पर है। यहां कश्मीर के गुलमर्ग की तरह बर्फबारी हमेशा होती रहती है। गेंगटोक आने वाले पर्यटक बर्फबारी का आनंद लेने नाथुला बार्डर जरूर जाना चाहते हैं। 14,500 फिट की ऊंचाई वाले इस दर्रे तक आने के लिए विशेष परमिट की जरूरत पड़ती है।अधिक उम्र वालों को यहां आक्सीजन की समस्या से जूझना पड़ता है। गेंगटोक के दक्षिण पूर्व में भूटान , दक्षिण में पश्चिम बंगाल और पश्चिम में नेपाल स्थित है।


सिक्किम के लोग नेपाली जैसे ही हैं, यूं तो यहां हिंदी भी बोली जाती है लेकिन नेपाली भाषा ही चलन में है। सिक्किम को भारत का नेपाल कहा जाय तो ग़लत नहीं होगा। नेपाल की तरह ही यहां लेपचा, भूटिया,मतांग, गुरुंग आदि जातियों की बाहुल्यता है। यह प्रदेश बौद्ध संस्कृति और विविध समुदायों के बीच मजबूत भाईचारे के लिए जाना जाता है।


1976 में सिक्किम भारतीय संघ का हिस्सा बना। 50 वर्ष पूर्व सिक्किम न तो खुशहाल था और न ही खूबसूरत। गरीबी और विपन्नता से घिरा हुआ यह पहाड़ी क्षेत्र बेतरतीब और बिखरा हुआ था। भारत का हिस्सा बनने के बाद यहां का जीवन नए सिरे से प्रारंभ होना शुरू हुआ। सिक्किम प्रदेश की करीब 60 प्रतिशत आबादी हिंदू धर्मावलंबी है।।


यहां पहुंचने के लिए पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी से सड़क मार्ग से ही आना पड़ता है। सड़क मार्ग नेपाल के तीस्ता नदी के किनारे होते हुए काफी दूरी तक रोमांचकारी यात्रा का बोध कराती है। रेलवे लाइन बिछाने का काम भी तेजी से चल रहा है लेकिन इसे पूरा होने में अभी तीन चार साल तक लग सकते हैं। रेलवे लाइन का काम पूरा हो पाया तो गेंगटोक से 36 किमी पहले रोम्पू तक ही रेलवे स्टेशन का विस्तार हो पाएगा। यहां से गेंगटोक आने के लिए फिर भी 36 किमी सड़क मार्ग से ही आना होगा। अभी सिलीगुड़ी से करीब सवा सौ किमी घुमावदार पहाड़ी मार्ग से होकर गेंगटोक तक पहुंचना पड़ता है। सिक्किम में एक दो नहीं ढेर सारे स्थल है जो आपको अपनी ओर लुभाते हैं।

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