July 30, 2026
#TPI Studio

राम मंदिर में चोरी – रामभक्तों के साथ धोखाधड़ी

जनहित याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई आज

अयोध्या के रघुकुल के वंशज राजा रामचंद्र के जन्मस्थान पर बने राम मंदिर के दान, चढ़ावे और अन्य वित्तीय प्रबंधन में घनघोर हेराफेरी के आरोप लग रहे हैं। इस सिलसिले में राममंदिर न्यास ट्रस्ट के विभिन्न समय पर अधिकारी रहे लोगों पर अलग-अलग आरोप लग रहे हैं। ताजा आरोप यह लग रहे हैं कि राम मंदिर में दान-चढ़ावे के दौरान लोगों द्वारा नकद राशियों के अलावा नए पुराने स्वर्णाभूषण का कोई हिसाब नहीं रखा जाता है। इसे मंदिर के विभिन्न पदाधिकारी विभिन्न समय में चोरी कर उठा ले जाते हैं और राम मंदिर ट्रस्ट के ऑफिस में जमा नहीं कराते और न ही उसे किसी रजिस्टर आदि में दर्ज किया जाता है।

उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने इन आरोपों के सिलसिले में ताजा आरोप लगाकर सनसनी फैला दी है कि भाजपा और आरएसएस के लोगों ने रामजन्मभूमि शिलापूजन के समय से ही चंदा जमा करनी शुरू की और 1400 करोड़ रूपए की चोरी की गई। विश्व हिन्दू परिषद् के अध्यक्ष अशोक सिंहल से यह पूछा जाए कि वो 1400 करोड़ रूपए कहां गए। कांग्रेस पार्टी के ट्विटर या अब एक्स हैंडल पर इस राममंदिर चोरी की जांच उच्च न्यायालय के सिटिंग जज से कराने की मांग की गई। रामजन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति ट्रस्ट की नियुक्ति पीएमओ द्वारा की गई थी और नृपेन्द्र मिश्रा को इसका अध्यक्ष बनाया गया था। इसलिए इस चोरी में पीएमओ भी शामिल है – ऐसा आरोप लगाया गया है।

इस रहस्योद्घाटन से पर्दा उठते ही भाजपा, आरएसएस सहित उत्तर प्रदेश की योगी सरकार औऱ केन्द्र की मोदी सरकार के पांव तले जमीन ही खिसक गई है। पहले पहल यह खबर राज्य सरकार के संज्ञान में आते ही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम(एसआईटी) गठित कर दी गई और उसे अपना रिपोर्ट पंद्रह दिनों मे सौंपने को कहा गया। एसआईटी की शुरूआती जाँच में ही दान-पात्र में चढ़ावे से संबंधिक गड़बड़ियों के ऐसे-ऐसे सबूत मिले कि सरकार के होश उड़ गए। इस जांच में ट्रस्ट महासचिव चंपत राय, प्रमुख सदस्य डॉ अनिल मिश्र और सदस्य गोपाल राव समेत 30 गणना पदाधिकारी औऱ उनके सरगना रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव पर उंगलियाँ उठ रही हैं।

एसआईटी ने कल निर्देश जारी कर दिया कि जाँच तक ट्रस्ट के पदाधिकारी अयोध्या से बाहर न जाएं। आरंभिक जांच कल रविवार को एसआईटी ने पूरी कर ली है। एसआईटी के रिपोर्ट में रिपोर्ट जल्द ही शासन को भेजी जाएगी। सूत्रों के मुताबिक मामले में ट्रस्ट के कई पदाधिकारी भी फंस रहे हैं। वहीं टिन्नू यादव समेत रकम पार करने वाले गणनाकर्मियों के खिलाफ पुख्ता सुबूत मिले हैं। इसलिए मामले में एफआईआर भी दर्ज होनी है। साथ ही ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी। मालूम हो कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन केंद्र सरकार ने किया था। यह ट्रस्ट श्री राज जनम्भूमि मंदिर निर्माण समिति से अलग है जिसके अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा हैं। इसलिए मामले में ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर कार्रवाई और पुनर्गठन में केंद्र सरकार की भूमिका रहेगी। यही वजह है कि लखनऊ से लेकर दिल्ली तक चर्चा जारी है। सूत्रों के मुताबिक एक-दो दिन के भीतर कार्रवाई शुरू हो जाएगी।

एसआइटी का यह भी कहना था कि महांकुभ के दौरान सबसे ज्यादा चोरी की गई, उस समय दानपेटी महज दो घंटे में ही पूरी भर जाती थी। मंदिर में रोजाना दस लाख लोग आते थे और पैसा-गहने आदि चढ़ा जाते थे।       

रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव की भूमिका पर सबसे अधिक सवाल उठे हैं। वह चंपत राय का ड्राइवर रहा है और वर्तमान में उसका हस्तक्षेप हर काम में था। सूत्रों के मुताबिक जिस एफआईआर की तैयारी चल रही है, उसमें टिन्नू प्रमुख आरोपी हो सकता है। उसके साथ गणनाकर्मी शामिल रहेंगे। वहीं अज्ञात में कई आरोपी बनाए जा सकते हैं। विवेचना में बड़े नाम जोड़े जाएंगे। विवेचना भी आईपीएस की निगरानी में गठित टीम से कराने पर विचार चल रहा है। जब ये सभी चीजें तय हो जाएंगी, उसके बाद तत्काल केस दर्ज होगा।

मामले में दाखिल जनहित याचिका (पीआईएल) पर सोमवार (22 जून) को हाईकोर्ट में सुनवाई संभावित है। याचिका में मामले की जांच सीबीआई या किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने और चढ़ावे का ऑडिट नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) से कराने की मांग की गई है। 

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