ईरान-अमेरिका भिड़ंत का अंत
अब सभी देशों के लिए खुलेगा होर्मुज जलडमरूमध्य
ट्रंप ने इस घोषणा को कुछ यूं लिखा – मैं मुक्त आवाजाही के लिए तत्काल होर्मुज को पूरी तरह खोलने और अमेरिकी नाकेबंदी को हटाने की मंजूरी देता हूँ। दुनिया के जहाजों इंजन चालू करो, तेल का प्रवाह होने दो।
अचानक सोमवार की सुबह अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने अस्सीवें जन्मदिवस पर तथा अमेरिकी लोकतंत्र के दो सौ पचासवीं वर्षगांठ के वर्षभर के कार्यक्रमों के दौरान सोशल मीडिया ट्रुथ सोशल पर ईरान-अमेरिका युद्ध के अंत की घोषणा करते हुए होर्मुज की नाकेबंदी खत्म करने की मंजूरी दे दी। इस समझौते के मसौदा दस्तावेज पर अपनी मंजूरी की पुष्टि की और पहले 14 मदों पर और बाद में संशोधन के बाद 13 मदों के करार पर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर करने की स्वीकृति प्रदान की। ट्रंप ने इस घोषणा को कुछ यूं लिखा – मैं मुक्त आवाजाही के लिए तत्काल होर्मुज को पूरी तरह खोलने और अमेरिकी नाकेबंदी को हटाने की मंजूरी देता हूँ। दुनिया के जहाजों इंजन चालू करो, तेल का प्रवाह होने दो।
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पूरे विश्व में इस घोषणा से खुशी की लहर दौड़ पड़ी और भारतीय शेयर बाजार का सेंसेक्स बीएसई सूचकांक एक प्रतिशत और 736 अंक ऊपर चढ़कर बंद हुआ। इसी के साथ ब्रेंट क्रूड ऑयल का दाम अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में कीमत 5 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। साथ ही डॉलर के मुकाबले रूपया मजबूत होकर 94.71 पर बंद हुआ। संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने इस संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। इस समझौते के कुछ प्रमुख बिन्दु इस प्रकार से हैं –
- इजरायल मध्य-पूर्व सहित लेबनान पर हमले बंद करेगा
- ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंध खत्म होंगे
- विभिन्न देशों में रोककर रखे गए अरबों डॉलर की रकम ईरान को जारी होगी
- होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का पहरा होगा
- अगले 60 दिनों तक अन्य समझौतों पर विचार-विमर्श होगा
- ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों में परमाणु आयुध का निर्माण नहीं होगा आदि
घटनाक्रमों पर नजर डालें तो हम पाते हैं कि 28 फरवरी को उस समय चल रहे द्विपक्षीय बातचीत के निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर हमले शुरू कर दिए और उस पहले हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई और अन्य कई शीर्ष कमांडर मारे गए। 1 मार्च से ईरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू की और मिसाइलों से हमले शुरू किए। तब से लेकर अब तक 108 दिन बीत चुके हैं और करीब साढ़े तीन महीने की लड़ाई में अरबों-अरबों डॉलर का वैश्विक आर्थिक नुकसान, अरबों-अरबों डॉलर के मानव श्रमदिवसों के नुकसान सहित, कई देशों के सैनिकों और कई देशों के नागरिकों की जान-माल का नुकसान भी शामिल है। इसके अलावा, विश्व के कई देशों में तेल-गैस ऊर्जा संकट के कारण आमलोगों पर मंहगाई की मार का नुकसान अलग ही है।
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शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में समझौते पर दस्तखत हो जाने के बाद से ईरान द्वारा समुद्र में बिछाए गए बारूदी सुरंगों को हटाए जाने का काम आरंभ होगा। अमेरिका के राष्ट्रपति द्वारा कल की घोषणा करने के बाद से अमेरिकी जंगी जहाजों को बेड़े ओमान की खाड़ी से पीछे हटने लगे हैं। आशा है कि इससे होर्मुज जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही सुरक्षित और सामान्य होने लगेगी और भारत सहित विश्व के अधिकांश देशों को तेल आपूर्ति बढ़ेगी, माल ढुलाई की लागत घटेगी और महंगाई की मार आम जनता पर कम होगी।
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