वसूली भाई या सेवाप्रदाता – ई-कॉमर्स कंपनियां
अब देशभर के लोगों में ऑनलाइन सामान खरीदने की आदत नहीं थी तो ऑनलाइन सामान बेचने वाले ई कॉमर्स कंपनियां फ्लिपकार्ट, आमेज़न प्लेटफॉर्म शुल्क नहीं वसूलते थे। जैसे-जैसे आम लोगों को ऑनलाइन सामान खरीदने का नशा, लत, चस्का लगता गया, तो फ्लिपकार्ट- आमेजन जैसी ई-कॉमर्स कंपनियां प्लेटफॉर्म शुल्क वसूलने लगी हैं। यह प्लेटफार्म शुल्क देखने में तीन, पांच, सात रुपया बहुत कम लगता है, लेकिन करोड़ों ग्राहकों से यदि पांच रूपया वसूले जाएं, तो समझिए यह आंकड़ा कहां जाकर बैठेगा।
आप लोग भलीभांति अनुभव ले चुके है जिओ सिम कार्ड ने जब ज़मीन पर अपना पैर रखना और पसारना शुरू किया तो सबसे पहले उसने आम लोगों को लाइन लगवाकर फ्री में लाखों-करोड़ों सिमकार्ड बांटे। एक साल की फ्री वैलिडिटी भी दिए, यानि आपके सिमकार्ड पर किसी किस्म का किराया नहीं लगेगा। देश के सभी लोगों ने अन्य टेलीकॉम कंपनियों को छोड़कर जिओ सिम लेकर चलाने लगे।
धीरे-धीरे जिओ कम्पनी ने रिचार्ज के बहाने पैसे वसूलने शुरू किए। जियो कंपनी का यह बिजनेस मॉडल बिलकुल गूगल की तरह था। जियो के शुरुआती दौर में इसका रिचार्ज बहुत सस्ता हुआ करता था और सर्विस भी अच्छी थी। लेकिन अब सर्विस वैसी नहीं रही और लोग कई बार रिचार्ज करवाने के लिए सोचते हैं। अब तो लोगों को मज़बूरी में रिचार्ज करवाना पड़ रहा है क्योंकि आज के समय में बिना नेट और रिचार्ज के अपने आपमें खालीपन-सा महसूस करेंगे। इसका एक सबसे बड़ा कारण है कि अधिकतर लोग बेरोजगार बैठे हैं और खलियर हैं। यानि उनके पास किसी किस्म का काम नहीं है। जिनके पास काम है भी वे भी काम करने के बाद थोड़ा समय रील्स, शॉर्ट वीडियो में अपना समय बिता रहें हैं। एक बहुत बड़ी परिघटना यह हुई है कि अधिकतर लोगों ने पढ़ना, लिखना और अपनों से बातें करना छोड़ दिया है।
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उसी तरह, अब देशभर के लोगों में ऑनलाइन सामान खरीदने की आदत नहीं थी तो ऑनलाइन सामान बेचने वाले ई कॉमर्स कंपनियां फ्लिपकार्ट, आमेज़न प्लेटफॉर्म शुल्क नहीं वसूलते थे। जैसे-जैसे आम लोगों को ऑनलाइन सामान खरीदने का नशा, लत, चस्का लगता गया, तो फ्लिपकार्ट- आमेजन जैसी ई-कॉमर्स कंपनियां प्लेटफॉर्म शुल्क वसूलने लगी हैं। यह प्लेटफार्म शुल्क देखने में तीन, पांच, सात रुपया बहुत कम लगता है, लेकिन करोड़ों ग्राहकों से यदि पांच रूपया वसूले जाएं, तो समझिए यह आंकड़ा कहां जाकर बैठेगा।
यह ठीक उसी तरह है, जैसा कुछ समय पहले बाज़ार में जिओ वाले वाईफाई फ्री लगाने का ऑफर दे रहे थे। जब लोगों ने वाईफाई अधिक लगवाना शुरू किया तो अब वे वाईफाई का शुल्क लेने लगे हैं। इसी तरह पहले आप फोन पे और गूगल पे से रिचार्ज करते थे तो प्लेटफार्म शुल्क नहीं वसूलते थे। जैसे-जैसे लोगों ने मोबाइल की दुकानों से रिचार्ज करवाना छोड़ दिया और अपने मोबाइल से अधिक से अधिक रिचार्ज करवाने लगे। घर बैठे या कहीं से भी झटपट रिचार्ज करवाने लगे तो एप्लिकेशन वालों ने सोचा कि नशा शरीर के अंदर पहुंच चुका है तो अब फटाफट प्लेटफार्म शुल्क लिया जाए। और इस तरह पेमेंट करने वाले ऐप ने शुल्क वसूली शुरू कर दी है।
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खैर UPI की बात कर लें। आज के दौर में और ‘डिजिटल इंडिया’ में ये देखा जा रहा है कि छोटे से पेमेंट से लेकर बड़े पेमेंट तक लोग अपने UPI से पेमेंट करते नज़र आ रहें है अब क्या आने वाले समय में UPI से पेमेंट करने पर शुल्क लेने की तैयारी भी धीरे-धीरे होगी? अभी तक तो नहीं हुआ है, लेकिन देखिए आनेवाले दिनों में क्या होता है।
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