August 7, 2026
#TPI Studio

भारत का बंटवारा – ब्रितानी ताकतों को संघी-लीगी सहयोग से

3 जून,


आज के दिन इस पोस्ट को हर साल लिखकर मैं पुनीत कर्तव्य निभाता हूं।


उसका कारण ये कि नेहरू ने गांधी द्वारा प्रधानमंत्री बनाये जाने के निर्णय को बार-बार उचित ठहराया था उसमें एक ये भी है।
संघी दक्षिणपंथी दुष्टों ने पटेल के मरने के बाद यूनियन आफ इंडिया इतना बड़ा देश बनाने के लिए पटेल को जिम्मेदार बताकर नेहरू को discredit करना शुरू किया क्योंकि नेहरू को बदनाम करना उस गैंग की आदत थी।


एक नक्शा साथ लगा हुआ है। पाठक इस नक्शे को ध्यान से पहले देख लें। देश पहले पोस्ट में दिख रहे नक्शे के हिसाब से बंट रहा था, जो चर्चिल जैसे बदमाश आदमी का बाल्कान प्लान था और बाल्कान माने टुकड़े-टुकड़े और केवल नीला हिस्सा भारत यानी कांग्रेस को मिल रहा था और हरा हिस्सा मुस्लिम लीग को। जिसमें लगभग काफी हिस्सा पंजाब और लगभग पूरा बंगाल तथा गुलाबी रंग वाले रियासतों से संप्रभुता वापस लेकर स्वतंत्र राष्ट्र बनाया जा रहा था और हिंदू महासभा और संघ इसके लिए तैयार थे क्योंकि ये रियासतों से रिश्वत खाते थे।


नेहरू ने माउंटबेटन पर दबाव डालकर ये प्लान बदलवा दिया और माउंटबेटन बहुत भला इंसान था। माउंटबेटन मान गया और माउंटबेटन केवल गांधी और नेहरू को मान्यता देता था और पटेल के अंदर वो माद्दा नहीं था, कि माउंटबेटन को मना सकें।
माउंटबेटन ने वो बाल्कान प्लान रद्द करके तीन जून प्लान से देश आजाद किया, तब यूनियन आफ इंडिया बना। इतना बड़ा देश और आधा बंगाल भारत को मिला, जिस पर जिन्ना बहुत नाराज़ हुआ और माउंटबेटन ने जिन्ना को आड़े हाथों लिया तब वो माना।


सबसे पहले जिन्ना की मुस्लिम लीग ने नेहरू और माउंटबेटन की दोस्ती से चिढ़कर उसकी पत्नी के प्रति लांछन लगाया जिसे मुस्लिम लीग की बहन हिंदू महासभा और अब उसकी नई बहन संघ-भाजपा दोहराती है और राजे-रजवाड़े आजतक नेहरू-गांधी परिवार से चिढ़ते हैं।
वो गांधी ही थे जिन्होंने महर्षि अरविन्द के अनुसार पूरे भारत की अवधारणा के लिए लड़ाई लड़ी और नेहरू हाथ से निकल चुके इतने बड़े भारत को वापस लेकर आये।


तीन जून के महत्व पर अभी इतना ही। आगे फिर जनसंघ, हिन्दू महासभा और मुस्लिम लीग की अंडरहैंड डीलिंग पर विस्तार से लिखूंगा।